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समाजवादी में मचे घमासान और सेक्युलर मोर्चे के गठन पर विशेष

वी.के.त्रिवेदी, लखनऊ (यूपी), NIT; ​पुरानी कहावत हैं कि राजनीति में रिश्तों एवं बड़प्पन का कोई महत्व नहीं होता है। राजनैतिक…

राजस्थान में मुस्लिम मयारी इदारों के फुकदान के कारण अन्य स्कूलों में प्रवेश के लिए मशक्कत कर रहे हैं मुस्लिम छात्र

अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT; ​राजस्थान के गावं-ढाणी से लेकर शहर-महानगरों तक में मुस्लिम समुदाय द्वारा सामाजिक या फिर निजी…

“अच्छे दिनों (?)” के चार साल, पर आम आदमी के मुस्कुराने के पल कितने? मंहगाई, मंदी और किसानों की आत्महत्याओं पर यह जश्न क्यों?

Edited by Arshad Aabdi, NIT; ​ लेखक: सैय्यद शहंशाह हैदर आब्दी चार साल काफी होते हैं किसी सरकार के कार्यकाल…

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