नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक करार दिए गए शिंदे – फडणवीस सरकार में 20 मंत्री गैरकानूनी तरीके से राजपाठ चला रहे हैं। कायदे से कुल 42 मंत्री होने चाहिए लेकिन सरकार ही अवैध है तो मंत्री परिषद का होने वाला विस्तार वैध कैसे हो सकता है तभी तो बीते एक साल से मंत्री मंडल का विस्तार अधर में लटका है। कोर्ट ने राज्यपाल नियुक्ति, 12 MLCs सीटों की नियुक्तियों पर रोक लगा रखी है। राज्य सरकार का सारा काम अफसरशाही की ओर से चलाया जा रहा है जिसका सीधा असर विकास और सेवा शासन पर पड़ रहा है। सत्ता की हवस को पूरा करने के लिए लोकतंत्र के सीने में कील ठोंककर राज्य में सरकार के नाम पर बनाई अजीब व्यवस्था के मातहत मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों में कुछ भी ठीक नहीं है। मंत्री गिरीश महाजन के गृह नगर जामनेर के उपजिला अस्पताल में कुल मंजूर 52 में 11 पद रिक्त पड़े हैं।

अस्पताल के प्रमुख डॉ विनय सोनवणे ने बताया कि मेडिकल ऑफिसर के कुल 7 पद हैं जिसमें 3 खाली हैं, एक वैद्यकीय अधिकारी ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है, दफ्तर बाबू के 4 में से 2 पद खाली हैं, लैब टेक्नीशियन का 1, एक्स रे टेक्नीशियन का 1, नेत्र चिकित्सा सहायक का 1, वार्ड बॉय 2, दांत का डॉक्टर 1 इस प्रकार से कुल 11 पद रिक्त पड़े हैं। हमने डॉ विनय से NRHM की ओर से बने नेत्र चिकित्सालय के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह विंग हमारे निगरानी में अवश्य है लेकिन उसके भीतर की जाने वाली कर्मियों की नियुक्ति वरिष्ठ स्तर से स्वतंत्र रूप से होगी।
कुछ महीने पहले NIT ने जिला परिषद स्वास्थ विभाग की हालत को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें ब्लाक मेडिकल ऑफिस की ओर से बताया गया था कि कुल मंजूर पदों में आधे पद रिक्त हैं। राज्य में भाजपा का सत्ता पर गैरकानूनी ढंग से अतिक्रमण कर बने रहने का एक लाभ जरूर हुआ है वह यह कि आरोग्य सेवा की बदहाली को लेकर भाजपा की ओर से सरकारी अस्पतालों की तोड़फोड़ और डॉक्टरों की पिटाई वाली घटनाएं अब नहीं होती। अतीत में जब भी भाजपा विपक्ष में रही है तब उसके विधायकों द्वारा हिंसक आंदोलन किए जाने का इतिहास रहा है।
