संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

नगर अमानगंज में उप डाक घर में पदस्त उप डाक पाल अपनी मनमर्जी से डाक घर चला रहे हैं। साहब किस समय डाक घर पहुंचेंगे और कब घर की ओर निकल जाएंगे कोई नहीं बता सकता। यहां कोई नियम कानून नहीं चलता है जिसका खामियाजा पोस्ट आफिस के खाता धारकों और उक्त आफिस से काम कराने वालों को भुगतना पड़ता है। यहां कभी सर्वर नहीं तो कभी लाइट नहीं और अगर सब कुछ है तो साहब नहीं और साहब मिल भी गए तो मोबाइल पर बिजी, अब आम आदमी क्या करे तो क्या करे ऐसे डिजटल इंडिया में मनमर्जी वाले साहबों का जो भूल जाते हैं कि हम जनता के सेवक हैं। यहां कोई देखने सुनने वाला ही नहीं है। लोगों ने बताया कि साहब से कुछ भी पूछो तो साहब की ललकार सुननी पड़ती है। कल आना, परसों आना, दिमाग खराब कर रहे हो जैसे शव्दों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है साथ ही खाता धारकों से एक अलग से लहजे में कहा जाता है कि बार बार जमा करने निकालने चले आते रकम, महीने में एक बार जमा करो और एक बार निकालो। पता नहीं ये साहब की मनमर्जी का कोई नया नियम बन गया है शायद। बहरहाल जो भी हो आम जन हैरान है परेशान है। हाल ही में लक्ष्मण बर्मन निवासी कुंवर पुर जिला पन्ना निवासी ने बताया कि मेरी मां गुलाब बाई बर्मन की मृत्यू 10 अप्रैल 2023 को हो गई थी उनका पैसा उप डाकघर अमानगंज में जमा था और मेरा नाम नोमनी में दर्ज है जो मेरी मां ने ही जुड़वाया था और उनकी मृत्यू अचानक हो गई पर आज तक मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है फिर फिर आना कह कर चक्कर कटवा रहे हैं। आखिर कब और कैसे सुधरेगा अमानगंज उप डाक घर का बदहाल डिजिटल मनमर्जी बाला सिस्टम???
