लिफ़्ट प्रोजेक्ट के लिए मंत्रालय में हलचल तेज, विधानसभा चुनाव में इसे वचन पूर्ति का मुद्दा बनाकर जनता के बीच पेश करने का सत्तापक्ष का दिख रहा है इरादा | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

लिफ़्ट प्रोजेक्ट के लिए मंत्रालय में हलचल तेज, विधानसभा चुनाव में इसे वचन पूर्ति का मुद्दा बनाकर जनता के बीच पेश करने का सत्तापक्ष का दिख रहा है इरादा | New India Times

2011 में तत्कालीन UPA सरकार की ओर से 250 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर की गई वाघुर लिफ़्ट इरिगेशन योजना का काम आज 13 साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। भूमिगत पाइपलाइन का 90 फीसद काम हो चुका है, इसी को जैसे तैसे पूरा कर नेताजी के हाथों वाटर पंप का बटन दबाकर पाइपलाइन से पानी को पास करवाकर इस स्कीम को लोकार्पित करने की हलचलें तेज हो गई हैं। राज्य में किसी भी समय विधानसभा के आम चुनाव हो सकते हैं जिसके चलते भगवा पार्टी अपनी एक एक सीट बचाने के लिए इस आधी अधूरी योजना को वचन पूर्ति के रूप में पेश कर जनता के बीच वोट मांगने के जुगाड़ में लगी है। वाघुर लिफ़्ट योजना से जामनेर-पाचोरा तहसील क्षेत्र के करीब 70 से अधिक गांवों की सूखाग्रस्त खेती की सिंचाई के लिए पानी देना है। 2014 – 19 गिरीश महाजन के जलशक्ति मंत्री रहते यह योजना पूरी हो जानी चाहिए थी। 13 साल के दौरान इस योजना का कोटेशन 1 हजार करोड़ रुपयों के ऊपर चला गया है बावजूद हार्ड स्टोन के कारण गोंडखेल में काम रुका पड़ा है। स्किम के संचालन पश्चात करीब 3 हजार कृषि तालाबों का निर्माण किया जाना है जिसका अब तक कोई अता पता नहीं है। वाघुर विभाग के आला अधिकारी अपनी ओर से किसी भी सार्वजनिक इरिगेशन योजना को लेकर कभी कोई जानकारी साझा नहीं करते जिसके चलते जनता को पता ही नहीं चल पाता कि आखिर किसी भी सिंचाई योजना के काम की वर्तमान स्थिति क्या है। NIT ने इस विषय पर 15 अप्रैल 2023 को एक स्टोरी प्रकाशित की जिसके बाद सूत्रों से उक्त जानकारी मिली है। ज्ञात हो कि जामनेर तहसील के लिए भागपुर, नार – पार, तापी – सुर नदी जोड़ प्रकल्प, कांग लिफ्ट योजना, उत्तरी इलाके में प्रतिभा सागर, बोदवड लिफ़्ट जैसी अनेकों योजनाओं के पूर्तता को लेकर राजकीय बयानबाजी की गई लेकिन जमीन पर हुआ कुछ भी नहीं।

By nit

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