नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

बीते चार महीने के नियमित और PMGKY के मुफ्त राशन वितरण में दुकानदारों द्वारा किए गए घपले को जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे अब सरकारी संरक्षण मिल गया है। मसले को लेकर NIT में प्रकाशित खबरों के बाद यह विषय जनता के बीच तक जाकर लोगों में जागृति आई थी लेकिन हैरानी की बात यह है कि आपूर्ति विभाग की ओर से किसी भी जांच के बगैर दुकानदारों को मात्र सदाचार की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। PMGKY के फ्री और नियमित राशन के वितरण में दुकानदारों द्वारा किए गए लाखों रुपयों के गेहूं चावल के गबन से जो भ्रष्टाचार किया गया है उसकी जांच और रिकवरी को लेकर प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। कुछ सेवाभावी लोगों ने इस प्रकरण की आधिकारिक जांच की लिखित मांग कर रखी है। ऑनलाइन सिस्टम को करेक्ट रखकर किए गए इस घोटाले की तकनीकी स्तर पर अगर ईमानदारी से जांच की गई और जांच के दौरान कार्ड धारकों के बयानों को दर्ज किया गया तो पूरे जलगांव जिले में राशन चोरी का एक बड़ा स्कैम उजागर होगा। राशन दुकानों के लाइसेंस की बात करें तो लगभग 80 फीसद दुकानें स्थानीय नेताओं के आशीष से उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं, ऐसे में उनसे सामाजिक न्याय और ईमानदारी की उम्मीद करना सरासर बेकार बात है। वितरण में पारदर्शिता के लिए यही लाइसेंस आज की तारीख में महिला बचत गुटों को देने की आवश्यकता है।
2013 के कार्ड कब वैध होंगे
2013 में जो केसरिया रंग के राशन कार्ड बने हैं उनको PMGKY से बाहर रखा गया है, यही नहीं इन कार्ड्स का नियमित राशन देने को लेकर दुकानदार गरीबों को बहुत छलते हैं। केसरिया रंग के कार्ड के स्टॉक को लेकर पनपती समस्या के चलते इस कड़ी में प्राधान्य कुटुंब के नाम पर एक नया खेल खेला जा रहा है। केसरी कार्ड की प्राधान्य कुटुंब में शामिल करने के लिए जरूरतमंदों से 2 हजार से 5 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
