अशफाक कायमखानी, जयपुर, NIT;
गुजरात के रिटायर्ड आईएएस अफसर आईबी पीरजादा को अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के दरगाह का नाजिम नियुक्त किया गया है। पिछले दिनों केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा नाजिम के पद के लिए इंटरव्यू लिए गए थे। हालांकि इंटरव्यू के विज्ञापन में सरकारी पद पर ही कार्यरत पात्र अधिकारी को आवेदन करने के लिए कहा गया था, लेकिन अब मंत्रालय ने जो आदेश जारी किया है, उसमें पीरजादा को 25 हजार रुपए मासिक मानदेय पर दरगाह कमेटी का नाजिम बनाया गया है।
मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि पीरजादा को गुजरात सरकार से पेंशन आदि की सुविधा मिल रही है, इसलिए उन्हें मानदेय ही दिया जाएगा। पीरजादा की नियुक्ति पर दरगाह कमेटी के सदस्यों को भी आश्चर्य हो रहा है। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि यदि रिटायर्ड अधिकारी को ही नाजिम बनाया जाना था तो यह बात इंटरव्यू से पहले बतानी चाहिए थी, ताकि अन्य रिटायर्ड अधिकारी भी आवेदन कर लेते। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीरजादा गुजरात प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे, लेकिन सेवा निवृति के अंतिम दिनों में उनकी पदोन्नति आईएएस के पद पर हो गई। मालूम हो कि पूर्व में मेवात के रहने वाले मेव कर्नल मंसूर अली को नाजिम बनाया गया था, लेकिन वह यहां के हालात में सुधार करने आये थे लेकिन पता नहीं क्या हालात बने कि उन्हें 6 माह में ही नाजिम के पद पर से तयाग पत्र देकर मंसूर अली सेना में वापस चले गए। पीरजादा की नियुक्ति आगामी 2 वर्षो के लिए हुई है।
कुल मिलाकर यह है कि हजारों लोग फैज उठाने के लिये हिन्द के वली ख्वाजा मइनूद्दीन चिस्ती दरगाह अजमेर में जियारत के लिए देश–विदेश से आते रहते हैं। यह भारत के एक बडे तबके की रुहानी आस्था का केन्द्र माना जाता है। दरगाह परीसर में बेहतर इंतेजाम व जायरीन को बेहतरीन सुविधा देने के लिये प्रबंध कमेटी के बाद नाजिम अहम माने जाते हैं। दरगाह खादिम , सज्जादानशीन व सरकार में बेहतरीन सामंजस्य बनाने के लिये अशफाक हुसैन बेहतरीन नाजिम साबित हुये हैं।
