ट्रैवेल करने वाले हो सकते हैं परेशान, सिविल अस्पतालों की ट्रांस्पोर्टिंग ठप, स्वैब देने के बाद रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार | New India Times

नरेंद्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

ट्रैवेल करने वाले हो सकते हैं परेशान, सिविल अस्पतालों की ट्रांस्पोर्टिंग ठप, स्वैब देने के बाद रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार | New India Times

ओमिक्रोन के सब वायरस BF.7 ने चीन समेत यूरोप के कुछ देशों में काफी उत्पात मचा रखा है, जिसके मद्देनजर भारत सरकार ने कई एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। स्वास्थ मंत्रालय ने बैठक कर देशवासियों के लिए मार्गदर्शक सूचनाएं जारी की हैं, जिसके अनुसार आने वाले दिनों में देश के भीतर यात्रा करने वाले नागरिकों को RTPCR Negative Certificate पास रखना पड़ेगा। वैसे व्यस्कों के लिए नाक के जरिये दी जाने वाली खुराक nasal vaccine को iNCOVACC ऐप से जोड़कर मंजूरी दे दी गई है जिसका प्रयोग जल्द शुरू हो जाएगा। नागपुर में महाराष्ट्र विधानसभा का शीतसत्र शुरू है, विभाग के मंत्री ने प्रशासन को अलर्ट मूड़ पर रखते हुए कहा है कि जनता को डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। मंत्री जी के आदेश के बाद भी प्रशासन का अचानक से अलर्ट होना तत्काल प्रभाव से मुमकिन नहीं है। मीडिया के बूते आरोग्यदुत के तमगे से गौरवान्वित मंत्री गिरीश महाजन के गृह जिले जलगांव के सभी 15 ब्लाक अस्पतालों की हालत यह है कि स्वैब ट्रैफिकिंग के लिए मौजूद वाहनों के चक्के रुके पड़े हैं।

ट्रैवेल करने वाले हो सकते हैं परेशान, सिविल अस्पतालों की ट्रांस्पोर्टिंग ठप, स्वैब देने के बाद रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार | New India Times

कोरोना प्रोटोकॉल में अगर आपको के किसी काम से सूबे के भीतर या बाहर जाना पड़ा तो आपको RTPCR Test कराना है। टेस्ट के लिए स्वैब नजदीकी सरकारी अस्पताल में देना है। मजे की बात यह है कि स्वैब देने के बाद इसे जिला अस्पताल भेजने के लिए अभी से लंबा इंतजार करना पड़ रहा है तो इससे समझ जाइए की आपको अपना टेस्ट रिपोर्ट कितने दिन के बाद मिलेगा। सोचिए स्वैब देने और उसकी रिपोर्ट आने के बीच अगर आप संक्रमित होंगे जो डिटेक्ट होना बाकी है तो उसका खतरा आपके लिए और आपके संपर्क में आने वाले लोगों के लिए कितना बढ़ जाता है। सिस्टम के भीतर सतर्कता का अभाव तो शुरुआत है हालात ऐसे ही रहे तो आपको स्वयं जलगांव सिविल अस्पताल जाकर स्वैब देने और रिपोर्ट लेने जाना पड़ेगा। निजी लैब में इस टेस्ट के लिए हजार से 1500 रुपये की फीस है जो गरीब और मिडल क्लास के बस की बात नहीं है, हां 15 लाख रुपए हर एक के खाते में आ जाते तो बात कुछ और थी। स्वैब ट्रैफिकिंग के कुप्रबंधन की ये समस्या बीते साल के अंत में भी आई थी जब कोरोना का कहर लगभग खत्म सा हो गया था। 2021 में कोरोना के विभीषिका में सर्वोत्तम काम करने का अनुभव रखने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनकी टीम जो आज विपक्ष मे बैठी है उनसे आम जनता यह मांग कर रही है कि वे सरकार को अनुशासित गतिमान स्वास्थ प्रबंधन को लेकर नीति बनाने के पर विवश करें।

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