देश में धर्मांतरण की लहर के बीच संत सम्मेलन का आयोजन गलत नहीं: गिरिश महाजन | New India Times

नरेंद्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

देश में धर्मांतरण की लहर के बीच संत सम्मेलन का आयोजन गलत नहीं: गिरिश महाजन | New India Times

गोदरी मे आयोजित किए जाने वाले बंजारा समाज कुंभ को लेकर पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल पर मंत्री गिरिश दत्तात्रय महाजन ने यह कहा कि देश में धर्मांतरण की लहर तेज है ऐसे में संत संमेलन का आयोजन गलत कैसे हो सकता है। हमारी सरकार जल्द ही जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान को लेकर जलगांव मे भाजपा द्वारा आयोजित मोर्चा का नेतृत्व कर रहे महाजन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के उस बयान की कड़ी निंदा की जिसमें बिलावल ने मोदी को गुजरात का कसाई कहा था। महाराष्ट्र मे राज्यपाल भाजपा प्रवक्ताओ तथा मंत्रियो द्वारा महापुरुषो , समाज सुधारको को लेकर आए दिन दिए जा अनर्गल बयानो को लेकर महाजन ने बड़ी आसानी से यह कहकर किनारे कर दिया कि ” महान शख्सियतों का अनादर करना नहीं चलेगा ” CM , DCM ने इस विषय में मंत्रियो को कड़ी सूचनाएं की है . छोटी छोटी बातो को लेकर विपक्ष ने राजनीती नही करनी चाहिए . प्रधानमंत्री के सम्मान मे पूरे देश भर मे सड़क पर उतरने वाली भाजपा को सूबे के महान शख्सियतो और समाज सुधारको के विचारधारा के प्रति कितना प्रेम और आदर है यह बताने की कोई आवश्यकता नही बची है . आज इसी मसले को लेकर महाविकास आघाडी ने मुंबई मे मोर्चा का आयोजन किया जिसे काउंटर करने के लिए PM के सम्मान को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओ को आंदोलनजीवी की भूमिका मे सड़को पर बवाल काटना पड़ा . महाजन के गृह नगर जामनेर मे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारो के साथ भुट्टो की फोटो फ्रेम को जूते मारे गए . विदित हो कि 1 दिसंबर को भारत ने सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता ग्रहण की . भारत द्वारा पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र कहे जाने पर ब्रीफिंग के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कहा था कि ” ओसामा बिन लादेन मर गया , लेकिन बुचर ऑफ गुजरात जिंदा है और वो भारत का प्रधानमंत्री है जब तक वो पी एम नही बना था तब तक उसके अमेरिका आने पर पाबंदी थी ” भुट्टो के इस बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है . विश्वगुरु भारत के पड़ोसी देश का एक मंत्री सुरक्षा परिषद मे भारत के प्रधानमंत्री को लेकर विश्व समुदाय के समक्ष इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है तो उसके बाद भारत सरकार के वैश्विक कूटनीतिक संबंधो पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

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