सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन अभियान के तहत शून्य से 25 वर्ष आयु वर्ग के महिला-पुरुषों की सेल एनीमिया की जांच की गई | New India Times

पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (मप्र), NIT:

सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन अभियान के तहत शून्य से 25 वर्ष आयु वर्ग के महिला-पुरुषों की सेल एनीमिया की जांच की गई | New India Times

धार जिले के तिरला मेंं कल 26/08/ 2022 को सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन अभियान के तहत ग्राम घोड़ाभाव एवं खिड़कियां कला में शून्य से 25 वर्ष आयु वर्ग के महिला पुरुष की सिकल सेल एनीमिया की जांच की गई. अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा तिरला ब्लाक अंतर्गत 5 जनजातीय ग्राम चाकलिया घोड़ाबाव सेमलीपूरा धोला हनुमान एवं खिड़कियां कला को सिकलसेल एनीमिया अंतर्गत गोद लिया है जिसके अंतर्गत उक्त ग्रामों में जीरो से 25 वर्ष आयु वर्ग के सभी महिला पुरुष की स्क्रीनिंग करना एवं सिकल सेल एनीमिया की जांच करना है पॉजिटिव मरीजों को चिन्हित कर उन्हें उचित उपचार देना अभियान का मुख्य उद्देश्य है आज ग्राम खिरकिया कला में 47 बच्चों की स्क्रीनिंग एवं सिकल सेल एनीमिया की जांच की गई जिसमें 3 बच्चे सिकल सेल एनीमिया के पाए गए वही घोड़बाव में 27 बच्चों का परीक्षण किया गया इसमें कोई भी बच्चा सिकल सेल एनीमिया का नहीं पाया गया.

सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन अभियान के तहत शून्य से 25 वर्ष आयु वर्ग के महिला-पुरुषों की सेल एनीमिया की जांच की गई | New India Times

सिकल सेल एनीमिया क्या है?

सिकल सेल एनीमिया सिकलसेल रोग या सिकलसेल रक्त अल्पता ड्रेपिनोसाइटोसिस एक अनुवांशिक रक्त विकार है जो ऐसी लाल रक्त कोशिकाओं के द्वारा चरितार्थ होता है जिनका आकार सामान्य कठोर तथा हंसिया के समान होता है यह क्रिया कोशिकाओं के लचीलापन को घटाती है जिससे विभिन्न जटिलताओं का जोखिम उभरता है. सिकलसेल लाल रक्त कोशिकाओ का जीवनकाल 10 से 20 दिनों का होता है और अस्थि मज्जा उन्हें तेजी से पर्याप्त मात्रा में बदल नहीं पाती है नतीजन शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की सामान्य संख्या और हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तिरला से डॉक्टर रिंकू कायथ, डॉक्टर नाथू सिंह मौर्य, मेडिकल ऑफिसर आयुष सुनील मुजाल्दे, खंड विस्तार प्रशिक्षक मीना भूरिया, बीपीएम अजय बुंदेला, एसटीएस संदीप राठड़िया, रेणुका भूरिया, सी एच ओ गीता खदेड़ा, सकू सोलंकी एएनएम के माध्यम से जांच की गई. अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय भोपाल से डॉ संजय प्रभुणे, डॉ हितेंद्र कुमार राम, डॉ संजय कुमार त्रिपाठी व डॉ सिद्धार्थ शुक्ला द्वारा विजिट किया गया।

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