अबरार अहमद खान /मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

द कश्मीर फाइल्स के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री द्वारा भोपाल वासियों को होमोसेक्सुअल बोलने पर लोगों में ज़बर्दस्त आक्रोश का माहौल पैदा हो गया है। ऐसे में एक युवक ने उन के इस बयान से आहत हो कर थाना अरेरा हिल्स में शिकायत कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अदालत में चालान पेश करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता न्यू अब्बास नगर गांधीनगर निवासी अनवर पठाान ने अपनी शिकायत में लिखा है कि आवेदक भोपाल का निवासी होकर देश का जागरुक नागरिक है एवं देश के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा एवं देश की एकता के लिए निरंतर कार्य करता रहा है। आवेदक समाज का प्रतिष्ठित व्यक्ति भी है। फिल्म निर्देशक आरोपी विवेक अग्निहोत्री द्वारा भोपाल की आवाम के खिलाफ मिथ्या एवं भ्रामक प्रचार कर एक वीडियो में भोपालियों को होमोसेक्सुअल कहने से आवेदक आहत होकर उक्त आवेदन प्रस्तुत कर रहा है। भोपाल की तहज़ीब दुनिया में अलग मुकाम रखती है तथा कई शौरा हज़रात अपने नाम के साथ फख्र से भोपाली तखल्लुस लिखते आए हैं जिनका नाम अदबी दुनिया में काबिल ए ज़िक्र है। मरहूम बरकतउल्लाह भोपाली साहब, मरहूम कैफ भोपाली साहब, मरहूम असद भोपाली साहब, मरहूम मोहसीन भोपाली साहब, मरहूम शेरी भोपाली साहब, मरहूम साहिर भोपाली साहब, मरहूम ताज भोपाली साहब, मरहूम शकीला बानो भोपाली और मौजूदा दौर में मंजर भोपाली साहब ने अपने फन से न सिर्फ भोपाल का बल्कि पूरे हिंदूस्तान का नाम दुनिया में रौशन किया है। वहीं शेर ए भोपाल नाम से मरहूम विधायक शाकिर अली खान साहब को जाना व पहचाना जाता रहा है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति मरहूम डॉ शंकर दयाल शर्मा भी भोपाल से तआलुक रखते थे। आरोपी विवेक अग्निहोत्री द्वारा सार्वजनिक तौर पर यह कहा गया कि मैं तो भोपाल में पला बढ़ा हुआ हूं लेकिन मैं भोपाली नहीं हूं। भोपाली का एक अलग मतलब है, मैं कभी आपको अकेले में समझाउंगा। अगर कोई कहता है कि वह भोपाली है तो सामन्य तौर पर मतलब होता है कि वह होमोसेक्सुअल है। विवेक अग्निहोत्री के उक्त कथन से भोपालियों की छवि धूमिल हुई है तथा भारत का संविधान जो प्रत्येक नागरिक को धर्म, जन्मस्थान, लिंग, रंग, क्षेत्र आदि के आधार पर बराबरी का अधिकार देता है का भी घोर अपमान हुआ है। अतः महोदय से निवेदन है कि आरोपी विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ कार्रवाई कर अति शीघ्र प्रकरण दर्ज कर चालान माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएं जो न्यायहित में उचित होगा।
