नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक साल पुराने मामले में सीआरपीसी 160 के तहत पुलिस की ओर से जारी नोटिस पर भाजपाइयों ने जमकर बवाल काटा है. पूरे राज्य में भगवा पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ठाकरे सरकार की मुखालफत के चक्कर में नोटिस को जलाकर कानूनी की धज्जियां उड़ाई. पूर्व मंत्री गिरीश महाजन के गृहनगर जामनेर में चंद कार्यकर्ताओं ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन की और इस औपचारिकता को पूरा किया. विपक्ष ने पुलिस अधिकरियों के तबादलों में घोटाले का आरोप किया था जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए SIT का गठन किया. तबादला घोटाला मामले में कुछ डेटा लीक हो जाने के प्रकरण में 5 अज्ञातों के खिलाफ मामला कलमबद्ध किया गया था. पूरे मामले में जांच के लिए बयान दर्ज कराने थे जिसमें फडणवीस को उनका बयान दर्ज कराने के लिए इससे पहले 6 बार नोटिस जारी की जा चुकी थी. आज मुंबई पुलिस खुद फडणवीस का बयान दर्ज कराने उनके सरकारी आवास पहुंची और 2 घंटे तक उनसे संवाद स्थापित कर बयान दर्ज किया गया. इसी बीच भगवा पार्टी ने इस कानूनी प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देकर राज्यभर में आंदोलन किए. गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटील ने मीडिया के माध्यम से इस मामले से जुड़े कानूनी तथ्यों को जनता के सामने रखा. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, मणिपु, गोवा, उत्तराखंड इन चार राज्यों में भाजपा की जीत ने महाराष्ट्र में 106 विधायकों के साथ सत्ता से बेदखल नंबर 1 की पार्टी के अंदर सत्ता की तड़प को बढ़ा दिया है. इसी व्याकुलता में फडणवीस को जारी नोटिस का बहाना बनाकर भगवा पार्टी की ओर से इवेंट प्रोपगेंडा फैलाने के लिए आंदोलन किए गए. टीवी मीडिया ने फडणवीस को सरकारी तंत्र से “पीड़ित व्यक्ति” के तौर पर पेश करने के लिए पूरी ईमानदारी से रिपोर्टिंग कर वैसा माहौल बनाया, इसके विपरीत तमाम सोशल साइड्स पर भाजपा का ये इवेंट जमकर ट्रोल किया गया जिससे टीम भाजपा को लेकर सूबे की बड़ी आबादी की क्या सोच है उसका अनुमान लगाया जा सकता है.
