डॉक्टर है ना दवाई ना उपकरण, नाम का है बस सरकारी दवाखाना, थांदला सिविल अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ाई, आक्रोशित ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

डॉक्टर है ना दवाई ना उपकरण, नाम का है बस सरकारी दवाखाना, थांदला सिविल अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ाई, आक्रोशित ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन | New India Times

थांदला नगर के सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं से ग्रामीणों को भी असुविधा होने लगी है। ग्रामीण क्षेत्र के गरीब मरीजों को इलाज करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हर छोटी से छोटी जाँच हो या आवश्यक दवाई सभी आवश्यक सुविधा भी सिविल अस्पताल में नहीं के बराबर है। इन सभी आवश्यक मांगों को लेकर जनजाति समाज सेवी कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नाम का ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को सौंपा है।

समाज सेवी सरपंच पिंटू डामोर, कैलाश निनामा, रमेश हूवर, दिलीप डामोर ने थांदला सिविल अस्पताल पर व्यापारी करण का आरोप लगाते हुए कहा कि सिविल अस्पताल में अधिकांश दवाई (मेडिसिन) बाहर की लिखी जा रही है जबकि नोट फ़ॉर सेल लिखी अस्पतालों की ड्रीप निजी अवैध रूप से संचालित बंगालियों के क्लिनिक पर मिल रही है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान सब्बू डामोर, नवल चारेल, धीरज अमलियार, शंकर मईडा, करण भाबर, जसवंत बामनिया, नरसिंह खोखर, सब्बू डामोर हुर्मल वानिया, उमेश मेडा, रवि वसुनिया, हरचंद खोखर, राजेश निनामा, तूफान भूरिया, मथियास डामोर, अकरु डामोर, राकेश कतीजा, कमल भाबर, दीपक मईडा, दिनेश भाबर, तौलिया भूरिया, अक्कू गणावा, विनोद निनामा, दीवान डामोर सहित अंचल के अनेक स्थानों के ग्रामीणजन एवं जनजाति समाज के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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