ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार और नागरिकों को प्रयास करना चाहिए: डॉ. विकास खुराना | New India Times

मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:

ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार और नागरिकों को प्रयास करना चाहिए: डॉ. विकास खुराना | New India Times

एस. एस. कॉलेज के कला संकाय द्वारा युवाओं को ध्वनि प्रदूषण के खतरनाक प्रभाव के प्रति जागरूक करने के लिए ‘ध्वनि प्रदूषण, कारक एवं निवारण’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता कला संकाय के अध्यक्ष डॉ आलोक मिश्रा ने किया। इस व्याख्यान में राजनीति विभाग के प्रमुख डॉ. आदित्य सिंह, अंग्रेजी विभाग के प्रमुख डॉ. शालीन सिंह, संगीत विभाग की प्रमुख डॉ. कविता भटनागर और इतिहास विभाग के प्रमुख डॉ. विकास खुराना को विषय पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया। डॉ. आलोक मिश्रा ने अपने जीवन के कुछ संस्मरणों के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों का विस्तार से चर्चा की साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि आज जिन पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और नागरिकों को अपने स्तर पर प्रयास करना चाहिए उसके लिए न्यायालय को सर्वप्रथम पहल करनी पड़ रही है। इसी क्रम में डॉ. आदित्य सिंह जी ने आज के तकनीकी जीवन में हैडफ़ोन, ईयरफोन आदि के लगातर प्रयोग करने से होने वाले नुकसान के बारे में छात्र – छात्राओं को जागरूक किया और बताया कि दीर्घकाल तक इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग करने से मानव में बहरेपन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। डॉ. शालीन सिंह जी ने ध्वनि प्रदूषण के कारणों और प्रभावों पर विस्तार पूर्वक चर्चा की और बताया कि आजकल के युवा अपनी मोटरसाइकिल के साइलेंसर को संशोधित कर रहे हैं और साथ ही प्रेशर हॉर्न का प्रयोग कर रहे हैं जिसके कारण ध्वनि प्रदूषण बहुत तेजी से फैल रहा है परिणामस्वरूप आज इंसान सिरदर्द, रक्तचाप आदि की बीमारी से ग्रसित हो रहा है। इसी क्रम में डॉ. कविता भटनागर जी ने ध्वनि प्रदूषण के समाधान में शास्त्रीय संगीत के महत्व को दर्शाते हुए कहा कि आज लोग शास्त्रीय संगीत से दूर हो रहे हैं और पश्चिमी संगीत ज्यादा सुन रहे हैं लेकिन शास्त्रीय संगीत की ध्वनि व्यक्ति के मानसिक स्थिति के लिए बेहतर है जबकि पश्चिमी संगीत की ध्वनि मानसिक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है। इसी क्रम में डॉ विकास खुराना जी ने ध्वनि प्रदूषण के निवारण के बारे में बताया कि शहरों में जहां बहुत ज्यादा आबादी रहती है वहां से सरकार को बड़े वाहनों के परिचालन पर रोक लगानी चाहिए।

अंत में व्याख्यान में उपस्थित छात्र – छात्राओं को भी इस विषय पर बोलने का अवसर प्रदान किया गया। बी. ए. तृतीय वर्ष की छात्रा आरती सैनी ने ध्वनि प्रदूषण को पर्यावरण के लिए हानिकारक मानते हुए कहा कि यदि पर्यावरण में ध्वनि प्रदूषण को कम करना है तो ज्यादा – ज्यादा वृक्षारोपण करने की जरूरत है क्योंकि वृक्ष ध्वनि को अवशोषित कर ध्वनि प्रदूषण को कम करते हैं। इसी क्रम में बी. ए. प्रथम वर्ष के छात्र आयुष ने शादी – विवाह में तेज आवाज में डीजे आदि के बजाने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही।

इस कार्यक्रम में समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम जी के अतिरिक्त डॉ. प्रमोद यादव , डॉ. दीपक सिंह , डॉ. सुजीत कुमार वर्मा , डॉ. दुर्ग विजय, डॉ. राजीव कुमार , डॉ. संदीप वर्मा , मृदुल पटेल, डॉ. दीपक दीक्षित , डॉ. सुभाषचंद्र पाल आदि शिक्षक भी उपस्थित रहे।

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