स्टेट बैंक ऑफ इंडिया डाल रही ग्राहकों की जेब पर डाका, केवाईसी के नाम पर जारी कर रही है क्रेडिट कार्ड | New India Times

रहीम शेरानी/कादर शेख, थांदला/झाबुआ (मप्र), NIT:

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया डाल रही ग्राहकों की जेब पर डाका, केवाईसी के नाम पर जारी कर रही है क्रेडिट कार्ड | New India Times

कहते हैं जनता का पैसा यदि सुरक्षित रखना हो तो उसके लिए बैंक सबसे सुरक्षित स्थान है लेकिन जब बैंक ही ग्राहकों की जेब पर डाका डालने लग जाये तो फिर आम जनता कहाँ जाये। एसा ही एक ताजा मामला थांदला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कृषि विकास शाखा में देखने को मिला जहाँ के कर्मचारियों द्वारा ग्राहकों को फोन करके केवाईसी के नाम पर आधार व पेन कार्ड आदि दस्तावेज लेकर बुलाया जा रहा है व बिना जानकारी दिए क्रेडिट कार्ड जारी किए जा रहे हैं। उस समय तो क्रेडिट कार्ड को इनके द्वारा पूर्णतया निःशुल्क भी बताया जा रहा है लेकिन फिर भारी भरकम बिल की वसूली शुरू हो जाती है।

हाल ही में इस बैंक के खाता धारक अमित जगदीशचन्द्र सोनी के साथ भी यही वाकया घटित हुआ जिसकी शिकायत उन्होंने हेड ऑफिस के साथ स्थानीय पुलिस थाने पर भी की है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया डाल रही ग्राहकों की जेब पर डाका, केवाईसी के नाम पर जारी कर रही है क्रेडिट कार्ड | New India Times

उन्होंने बताया कि उन्होंने केवाईसी के नाम पर अपने दस्तावेज दिए जिसके आधार पर बैंक द्वारा क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया गया, उनके मना करने पर भी बार बार कॉल करके परेशान किया जा रहा है व कार्ड लेने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। अन्य ग्राहक पवन नाहर बताते हैं कि उन्हें भी करीब दो वर्ष पूर्व जबरन क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया गया था व उसकी रिकवरी के नाम पर हजारों रुपये मांगे जा रहे हैं जबकि उनके खाता लम्बे समय से स्कूटनी की वजह से सीज है व क्रेडिट कार्ड को एक्टिव तक नहीं करवाया गया था बावजूद इसके रात को भी बैंक के कॉल आ जाते हैं व पैसा जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।

14 फरवरी को जहाँ विश्व प्रेम दिवस मना रहा है वहीं स्टेट बैंक ग्राहकों को जबरन क्रेडिट कार्ड का तोहफा देने पर आमादा है जो सीधे तौर पर ग्राहकों की जेब पर डाका ही कहा जा सकता है।

इस सम्बंध में शाखा प्रबंधक रामजी राय का कहना है कि संस्था के कर्मचारियों द्वारा ग्राहकों के हित की बात ही बताई जाती है उन्हें मेचुअल फंड, संस्थागत ऋण व क्रेडिट कार्ड के फायदें बताये जाते हैं वहीं उनके चाहने पर उनके हस्ताक्षरित आवेदन के आधार पर ही क्रेडिट कार्ड जारी किया जाता है या अन्य कोई कार्य किये जाते हैं बैंक सम्बन्धित ग्राहक से ही व्यवहार करती है न कि उनके कहने पर भी उनके रिश्तेदार या अन्य किसी परिजन से भी व्यवहार करती है। यहाँ सभी प्रक्रिया ऑन लाइन व ऑफ लाइन में ग्राहक की रजामंदी व उनके हस्ताक्षर अथवा रजिस्टर्ड मोबाइल की ओटीपी नम्बर लगते है जो उनके द्वारा ही दिए जाते हैं इसलिए सारे आरोप निराधार व बेबुनियाद हैं।

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