मुसलमानों को खुलेआम मारने की धमकियों के बावजूद सरकार की चुप्पी देश की व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक: जमीअत उलेमा-ए-हिंद | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

मुसलमानों को खुलेआम मारने की धमकियों के बावजूद सरकार की चुप्पी देश की व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक: जमीअत उलेमा-ए-हिंद | New India Times

जमीअत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में अभद्र भाषा एवं मुसलमानों की खुली हत्या की धमकी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की चुप्पी देश के लिए “बेहद खतरनाक है।
मौलाना मदनी ने गृह मंत्री श्री अमित शाह एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यालय को पत्र लिखकर इस पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि यहां जो हो रहा है वह देश में शांति व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए मेरी मांग है कि आयोजकों और वक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने भड़काऊ और नफरत भरे भाषण दिए, खुले तौर पर मुसलमानों के नरसंहार का आह्वान किया और पूरे हिंदू समुदाय से सशस्त्र होने का आग्रह किया।

मुसलमानों को खुलेआम मारने की धमकियों के बावजूद सरकार की चुप्पी देश की व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक: जमीअत उलेमा-ए-हिंद | New India Times

कार्यक्रम के अध्यक्ष और संरक्षक प्रमुख यति नरसिंह नंद ने कहा, “यदि कोई हिंदू, आतंकवादी संगठन LTTE प्रमुख प्रभाकरण बनना चाहता है, तो मैं पहले इस उद्देश्य के लिए एक करोड़ रुपये की पेशकश करूंगा और शेष 100 करोड़ रुपये जुटाऊंगा।” हर हिंदू मंदिर को एक प्रभाकरण की जरूरत है। एक अन्य वक्ता ने कहा कि यदि सौ हिंदुओं ने एक सेना बनाई और दो मिलियन मुसलमानों को मार डाला, तो इसे हिंदुओं की जीत घोषित किया जाएगा। प्रत्येक भारतीय नागरिक को उन्हें (मुसलमानों) को उखाड़ने के लिए सफाई अभियान में शामिल होना चाहिए। तैयार रहें और ऐसा करने की तैयारियों पर चर्चा करें।”
मौलाना मदनी ने अपने पत्र में इन बयानों का उल्लेख किया है और सरकार से देश के संविधान और कानून के शासन और सर्वोच्चता की रक्षा करने का आह्वान किया है।

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