नरेंद्र इंगले, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

पंचायत राज कमेटी के आने से पहले कमेटी को देने के नाम पर स्थानीय पंचायत समिति प्रशासन द्वारा विभिन्न इकाइयों से लाखों रुपये जमा किये गए चंदे की रकम में गबन को लेकर प्रशासन के भीतर अब हल्ला मचना शुरू हो गया है. लोकनिर्माण, स्वास्थ, ग्रामीण, शिक्षा, सामाजिक न्याय, सिंचाई समेत तमाम विभागों को चंदा जमा करने के फ़रमान जारी किए गए थे. प्रत्येक विभाग के हर एक कर्मी से 300 से 500 रूपये तक पैसे जमा किये गये जो लगभग 25 लाख रूपये बताई जा रही है. PRC आई लेकिन कोई अधिकारी नपा नहीं गया, शायद चंदे की रकम ने अपना काम कर दिया होगा. चंदे के नाम पर कर्मियों का आर्थिक शोषण कर जो पैसा जमा किया गया था उसमें अब गबन की शिकायतें सामने आ रही हैं. यह मामला ऐसा है कि कर्मी गण उसकी जांच की मांग नहीं कर सकते. इस चंदा संस्कृति ने जहां कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया है वहीं चंदे के पैसों का गबन करने वालों ने नैतिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं. PRC चंदा मामले को लेकर और कई ऐसी जानकारिया सामने आ सकती हैं जो ऑन रेकॉर्ड हैं.
जामनेर पंचायत समिति ये राज्य में एकमात्र ऐसी संस्था होगी जिसमें नेताजी के भरोसे स्थानीय लोकसेवक बिना तबादलों के वर्षों से एक ही कुर्सी पर टिके हुए हैं. प्रशासन के प्रमुख सुबह दफ्तर आते हैं हाजरी बुक में दस्तखत करते हैं और पूरा दिन अपने खेतों, घरेलू तथा निजी कामकाजों में व्यस्त रहते हैं लेकिन वेतन सरकार से लेते हैं.
TA बिल में घपला
Traveling allowns के फर्जी बिल रेकॉर्ड में डालकर महीने का हजारों रुपया सरकारी तिजोरी से निकाल लिया जा रहा है, इस मामले की जांच तो बनती है! कुल मिलाकर पंचायत समिति में कमीशन के माध्यम से सरकारी तिजोरी की लूट मची हुई है.
