नरेंद्र इंगले, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

7 सितंबर को जामनेर तहसील में बारिश और चक्रावात के कारण फसलों की बर्बादी के बाद स्थानीय नेताओं के बाद अब मंत्रियों के दौरे लगातार जारी हैं. सरकार की ओर से अभिभावक मंत्री गुलाबराव पाटिल के बाद अब कृषि मंत्री दादा भूसे ने बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया है. हिंगने पहुँचे भूसे ने जनप्रतिनिधि होने के नाते केला बागानों का मुआयना करने के लिए कुछ दूर तक मोटरसाइकिल चलाई फिर आगे केला बागान तक जाने के लिए 2 किमी तक पैदल चलना उचित समझा तो बस मीडिया की ब्रेकिंग हेडलाइन्स का इंतजार खत्म हो गया. इससे पहले गुलाबराव पाटिल के दौरे में मीडिया ने किसानों की फसलों की हुई क्षति को लेकर रिपोर्टिंग करने के बजाये पोलिटिकल सवालों पर ओपन स्टुडियो वॉर रूम खोल दिया तो बाढ़ पीड़ितों ने मीडिया को ही लताड़ दिया. वैसे पॉलिटिक्स मीडिया का पार्ट ऑफ बिजनस हो गया है और मीडिया ने पॉलिटिक्स को जनता के ऊपर पार्ट ऑफ लाइफ की तरह थोप दिया है. कैमरे ऑन हैं पर बूम पर पूछे जाने वाले बुनियादी सवाल और जवाब दोनों गायब कर दिए गए हैं. बाढ़ के कारण क्षेत्र में फसलें चौपट होने से किसानों का जो आर्थिक नुकसान हुआ है उसका आंकड़ा 50 करोड़ से अधिक हो सकता है. फसल बीमा कंपनी से क्लेम पाने हेतु कागजी खानापूर्ति के कामकाज के लिए किसानों ने भागदौड़ शुरू कर दी है. ठाकरे सरकार में शामिल तीनों दलों के मंत्रियों के आगामी दौरे फिक्स किए जा रहे हैं. स्वाभाविक है विपक्ष भी इससे अछूता नहीं रहेगा, दोनों सदनों के नेता प्रतिपक्ष, केंद्रीय मंत्रीगण समीक्षा करने आ सकते हैं. इन सब के बीच नवंबर में विधानसभा का शीतकालीन सत्र आ जाएगा तब तक मुआवजे के तौर पर कुछ रकम बाढ़ पीड़ित किसानों के खातों में जमा की जाएगी ताकि रबी की बुआई में किसानों को कोई परेशानी न हो. सरकार किसी भी पार्टी की या पार्टियों की मिलकर बनाई हुई हो आखिर वो आम आदमी की पार्ट ऑफ लाइफ है.
