कासिम खलील, बुलढाणा (महाराष्ट्र), NIT;
एक छात्रा को आईटीआई में दाखले के लिए एससी जाती के प्रमाणपत्र की ज़रूरत पडने पर वह बुलढाणा तहसिल कार्यालय गई, जिसे एक एजेंट ने अपने झांसे में ले कर उसे जाली प्रमाणपत्र दे दिया। इस बारे में तहसिलदार सुरेश बगले को पता चलते ही उन्होंने एजेंट को पकड़ कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। यह घटना आज शाम 5 बजे की है।
बुलढाणा के इंदिरा नगर निवासी विधवा सुशीला उत्तम गवई अपनी बेटी कोमल को आईटीआई कराना चाहती है, जिसके लिए उसे अपने एससी प्रवर्ग के जात प्रमाणपत्र की ज़रूरत थी। इस काम के लिए वह सभी ज़रूरी दस्तावेज़ ले कर 26 जून को तहसील कार्यालय में गई जहां उनकी मुलाक़ात तहसील में बतौर एजेंट के काम करने वाले 50 वर्षीय सिद्धार्थ बाबुराव झीने से हुई। झीने ने 1 हज़ार रुपए ले कर जाती प्रमाणपत्र देने का कहते हुए सुशीला गवई को हामी भरी। आज 1 जुलाई को एजेंट झीने ने सुशीला गवई को तहसील कार्यालय के पास बुलाया और जाली बनाया हुआ जाती प्रमाण पत्र दे दिया। सुशीला गवई प्रमाण पत्र ले कर अपने किसी परिचित से मिलने के लिए तहसिल कार्यालय में पहूंची जहां उनकी मुलाकात तहसील में कार्यरत उनके एक रिश्तेदार से होने पर बातचित के दौरान अपनी बेटी का नया बनाया हुआ जाती प्रमाण पत्र उन्हें बताया तो कर्मी के समझ में आ गया कि प्रमाणपत्र जाली है। ख़ास बात तो यह है कि अब राज्य शासन के आदेश पर सभी जाती प्रमाणपत्र ऑनलाइन किए जा रहे हैं, जिन पर एसडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर रहते हैं और ये प्रमाणपत्र मैनुअली था जिस पर एसडीओ का हस्ताक्षर पेन से मारा गया था। तत्काल वह कर्मी सुशीला गवई को ले कर तहसिलदार सुरेश बगले के पास पहुंचा और उन्हें पूरा माजरा बताया। यह जान कर तहसिलदार बगले भी हैरत में पड गए और उन्होंने तहसील कार्यालय के बाहर खड़े यह जाली प्रमाण पत्र देनेवाले एजेंट सिद्धार्थ झीने को अपनी केबिन में बुलाकर फौरन पुलिस को सूचित किया। कुछ ही पल में पुलिस वहाँ आ गई और झीने को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है।
खबर लिखे जाने तक बुलढाणा शहर पुलिस थाने में अपराध दर्ज किये जाने की प्रक्रिया चल रही थी।
एसडीओ कार्यालय से गायब है रजिस्टर
एजेंट सिद्धार्थ झीने ने सुशीला गवई को एससी जाती का जो जाली प्रमाणपत्र दिया है उसका नम्बर 7826/2011 लिखा है और डेट ऑफ़ इशू 2 फ़रवरी 2011 बताई गई है। इस विषय में जब तहसिलदार बगले को कुछ शंका हुई तो उन्होंने बुलढाणा एसडीओ कार्यालय से संपर्क कर ये जानने कि कोशिश की कि इस नम्बर का जाती प्रमाणपत्र किसे दिया गया है? तब एसडीओ कार्यालय से बताया गया कि 10 अगस्त 2010 से जुलाई 2011 इस कार्यकाल का एक रजिस्टर ऑफिस से गायब है। इससे यह पता चलता है कि एजेंट सिद्धार्थ झीने को यह पता है कि एक रजिस्टर ग़ायब है और उसने इसी कार्यकाल में दिए गए जाती प्रमाणपत्र का नम्बर सुशीला गवई की पुत्री कोमल के प्रमाणपत्र पर डाल कर उसे दे दिया था।
कोट:-
एससी जाती का जाली प्रमाणपत्र देने वाले सिद्धार्थ झीने को पकड़ कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है जिसके खिलाफ पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया जा रहा है। इस मामले में और भी कुछ लोग शामिल हो सकते है उन पर भी कार्रवाई की जाएगी: सुरेश बगले, तहसिलदार, बुलढाणा।

Ek special racket hai jo hamesha kam karta aa raha hai aur unse karmchariyon ko ghus bhi milati hai.nahi to ye log kaise hote yanha