अबरार अहमद खान, भोपाल, NIT;
ग्वालियर की डीआरपी लाइन में पदस्थ महिला सब इंसपेक्टर वंदना परमार ने आर्म्स ट्रेनिंग के बाद सिवनी में दरोगा पति से मिलकर सोमवार सुबह ग्वालियर लौटी थी लेकिन किसी कारण सायं सात बजे बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या क ली। बताया जा रहा है कि जिस वक्त उसने फांसी लगाई, घर में ससुर, मौसी सास मौजूद थे, लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भिंड निवासी वंदना परमार 2016 में एसआई चुनी गईं थीं। करीब डेढ़ महीने इंदौर में आर्म्स ट्रेनिंग (एटीपी) पूरी करने के बाद सिवनी जिले में एस आई पद पर पदस्थ अपने पति चंद्रशेखर कुशवाहा के पास चली गई थी और सोमवार सुबह ही ग्वालियर लौटी थी।
वंदना से मिलने उसकी सहेली क्रांति राजपूत शाम को घर पहुंची तो उन्हें घरवालों ने बताया कि वंदना बाथरूम में है। क्रांति ने जब दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई आवाज नहीं आई। उसने दरवाजे से झांककर देखा तो वंदना का शव बाथरूम में शॉवर से लटका हुआ था। क्रांति ने घर में मौजूद सदस्यों को बताया तो फिर गेट तोड़कर शव उतारा गया और पुलिस को सूचना दी गई।पुलिस ने घर से सुसाइड नोट ढूंढने की कोशिश की लेकिन ऐसा कोई कागज हाथ नहीं लगा जिससे खुदकुशी का कारण सामने आसके। ससुर डॉ. बीरबल सिंह व अन्य ससुरालीजन मामले में कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि घटना स्थल पर वंदना के दो मोबाइल फोन मिले हैं। जिनमें एक स्मार्ट और दूसरा सामान्य फोन है। दोनों फोन की आज जांच कराई जाएगी। फोन में कोई न कोई ऐसा क्लू भी मिल सकता है जिससे वंदना के सुसाइड का कारण खुल सके।
बताया जा रहा है कि वंदना की 6 साल की बेटी भी है। घटना के वक्त वह घर के दूसरे कमरे में खेल रही थी और वंदना अपने कमरे में थी। सुसाइड से पहले वंदना ने बिस्तर पर अपने फोन रखे और बेटी से हाय-हैलो कर बाथरूम में चली गई। कुछ देर बाद वंदना की मौत की खबर बाहर आई तो बेटी का रो-रोकर बुरा हाल था।
