मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अतिक्रमण के विरुद्ध कार्यवाही पर रोक के बावजूद नजूल ने जारी की नोटिस, सैयद ख़ालिद क़ैस ने टीटीनगर तहसीलदार की इस कार्यवाही को बताया गैर कानूनी और ग्रामीणों को प्रताड़ित करने का आधार | New India Times

अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अतिक्रमण के विरुद्ध कार्यवाही पर रोक के बावजूद नजूल ने जारी की नोटिस, सैयद ख़ालिद क़ैस ने टीटीनगर तहसीलदार की इस कार्यवाही को बताया गैर कानूनी और ग्रामीणों को प्रताड़ित करने का आधार | New India Times

कोरोना काल में भोपाल ज़िला प्रशासन द्वारा जनता कर्फ्यू बनाम लॉक डाउन लगभग एक माह से अधिक समय से लगा रखा है। बढ़ते संक्रमण के कारण शासन के निर्देश पर शासकीय कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति भी कम है।जनता घरों में क़ैद है ऐसे में भोपाल की टीटी नगर नजूल दफ्तर में लोगों को परेशान किये जाने का मामला प्रकाश में आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसीलदार टीटीनगर न्यायालय से दिनाँक 14.05.2021 को मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 248(1)के तहत समस्त झुग्गीवासी कलियासोत डेम ग्राम सिंगपुर को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर कल दिनाँक 21.05.2021 को हाज़िर होने के निर्देश दिए हैं। ग्रामवासियों पर आरोप है कि उनके द्वारा ग्राम सिंगपुर पटवारी हल्का नम्बर 97 के खसरा क्रमांक 17/5/2 एवं 18/8 भूमि पर गाय भैंसों हेतु 12 पशुगृह बनाकर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया है। 21 मई को हाज़िर होकर जवाब नही देने पर बेदखल किया जाएगा।
गौरतलब हो कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार 15 जून 2021 तक किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के विरुद्ध कार्यवाही पर रोक लगाई गई है।प्रदेश भर की अदालते बन्द हैं।प्रदेश भर के प्रशासनिक अधिकारी कोरोना संक्रमण की रोकथाम में जी जान लगाये हैं।गरीबों की विनती सुनने को कोई शासकीय दफ्तर खुला नही कोई अधिकारी दफ्तरों में उपलब्ध नही ऐसे विकट समय में टीटीनगर नजूल दफ्तर सारे आवश्यक कार्य छोड़कर अतिक्रमण वह भी गाय भैंस का पशुगृह बन्द करवाने के लिए ग्रामवासियों की क्लास अपने दफ्तर में लगाएंगे। तहसीलदार टीटीनगर का यह कार्य एक तरफ जहां हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना है वही मुख्यमंन्त्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश की धज्जियाँ उड़ाने का प्रयास?
कोरोना काल में जहां श्मशानों में लाशों के ढेर हैं,उपचार अभाव में जनता मर रही है।कोरोना के दंश से मुक्ति मिली नही कि ब्लेक फंगस और अब वाइट् फंगस से ख़ौफ़ का माहौल है,ऐसे में तहसीलदार टीटीनगर को अपनी अदालत लगाने और ग्रामीणों को बुलाने की फुर्सत कैसे मिल गई। वर्तमान समय में लॉक डाउन खुलने तक क्या कार्रवाई होना ज़रूरी थी?
क्या? ग्रामीणों पर लगाये गये आरोप अनुसार अतिक्रमण कर बनाये गए 12 पशुगृह यूं अचानक बन गए।
क्या ? लॉक डाउन से पहले राजस्व निरीक्षक और पटवारी सो रहे थे जो अतिक्रमण होता रहा।
क्या ? यह क़ानूनी कारवाही ग्रामीणों से वसूली का कोई माध्यम तो नही।
इन तमाम सवालों के जवाब आने वाला समय बताएगा ।यदि इस पर कलेक्टर,एसडीएम और प्रदेश की मुखिया ने गौर कर लिया तो सच्चाई उजागर हो सकती है।
मध्यप्रदेश कॉंग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सैयद ख़ालिद क़ैस ने टीटीनगर तहसीलदार की इस कार्यवाही को गैर कानूनी और ग्रामीणों को प्रताड़ित करने का आधार बताया।

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