मप्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत का हाल है बेहाल, नगर परिषद का कर देने वाले ग्राम वासी ग्राम पंचायत सुविधाओं से भी वंचित | New India Times

पीयूष मिश्रा, सिवनी ( मप्र ), NIT; ​मप्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत का हाल है बेहाल, नगर परिषद का कर देने वाले ग्राम वासी ग्राम पंचायत सुविधाओं से भी वंचित | New India Timesछपारा ग्राम की आवादी २५ से ३० हजार है जो कागजों में छुपाये नहीं छुपी।यहां तो नगर परिषद दस वर्ष पूर्व ही बन जाना चाहिए था लेकिन जनप्रतिनिधीयों की उदासीनता के चलते नगर परिषद बनवाने की तरफ कोई पहल नहीं की गई, जिसका खामियाजा आज छपारा के नागरिक भुगत रहे हैं। म.प्र.की सबसे बडी ग्राम पंचायत के नाम से गौरवान्वित तो होते हैं पर पंचायत के कर्णधार बडी पंचायत का रोना रोते नजर आते हैं। छपारा ग्राम पंचायत को कागजों मे नगर परिषद का दर्जा देकर ग्राम की जगह नगर परिषद के हिसाब से कर वसूला जा रहा है पर छपारा की जनता को नगर तो छोडो ग्राम पंचायत स्तर की मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ग्राम पंचायत के पास पानी टेन्कर के साथ ट्रेक्टर ट्राली भी विधायक और जिला पंचायत के सहयोग से दिया जा चुका है। जिससे छपारा के नागरिकों को मूलभूत सुविधा असानी से उपलब्ध हो सके परन्तु एेसा इस पंचायत में कुछ नहीं है। सरपंच-सचिव की मिलीभगत से छपारा का विकास रूका पडा है और पंचायत आराम से कुलर की हवा ले रहा है। छपारा नगर में नलजल बन्द पडे हैं, सफाई व्यवस्था चौपट पडी है, कई महिनों से नगर की नालियों की सफाई नहीं की गयी है। बजबजाती व सडांध भरी दुर्गन्ध मारती नाली से नगर के बहुत से वार्डों से निकलना दूभर हो गया है। गंदा दुषित पानी नालियों में एकत्रित पडा है, जिससे मच्छरों की संख्या में इजाफा हुआ है।

वर्षाकाल प्रारम्भ हो चुका है। पिछले वर्ष वर्षा के दौरान नालियां चोकप होने व वर्षा का जल निकासी की कोई व्यवस्था पंचायत द्वारा नहीं की गयी थी। कुछ कथाकथित अवैध कॉलोनियों के साथ सांठ गांठ कर अवैध निर्माण को नजर अंदाज करना महंगा पड गया था। समय रहते जल निकासी पर बारबार समाचार पत्रों के माध्यम से पंचायत को सचेत किया गया था पर ग्राम पंचायत की मनमानी के चलते वर्षा पूर्व जल निकासी के लिये कोई कदम नहीं उठाया गया। ऐसा भी नहीं की सफाई के नाम से रूपये खर्च नहीं किये गये। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च भी किये गये परन्तु कागजों में सफाई का परिणाम कुछ दिनों बाद ही सामने आ गया। नगर के कई वार्ड जलाशय में बदल गये। कई मकानों की रोजमर्रा की वस्तु और बर्तन रात के समय पानी में तैरते नजर आये। नगर के जागरूक पत्रकारों के अग्रह पर स्थानीय प्रशासन ने अनन फनन में जलग्रस्त पीडितों को भोजन व रहने की व्यवस्था बनायी थी। इस वर्ष भी वर्षाकाल प्रारम्भ हो गया है और जल निकाली के लिये न तो पंचायत स्तर से कोई कदम उठाये गये और न ही तहसीलदार द्वारा कोई प्रयास किया जा रहा है। यदि दो चार दिनों में जल निकासी के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये तो वो दिन दूर नहीं जिसमें नगरवासियों को बीते दिन याद आ जाएं।

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