हिमांशु सक्सेना, ग्वालियर (मप्र), NIT:

रोजेदारों ने गुरुवार को रमजान का दूसरा रोजा अजान की आवाज सुनकर खोला। जहां अजान की आवाज नहीं पहुंच सकी, वहां इफ्तार का वक्त देखकर रोजा खोला गया। कोरोना कर्फ्यू के चलते शहरकाजी अब्दुल अजीज कादरी ने सभी मुस्लिमों से घर में ही रहकर इबादत करने की अपील थी। इसके चलते मुस्लिम समाज के लोग घर में ही रहकर ही पांच वक्त की नमाज अदा कर रहे हैं। मस्जिदों में सिर्फ इमाम समेत मस्जिद के व्यवस्थापक 3 लोगों ने ही सुन्नात तरावीह की नमाज पढ़ी।
रमजान का पहला अशरा शुरू

शहर काजी ने बताया कि इस्लाम के मुताबिक रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पाक महीने रमजान में 3 अशरे होते हैं। अशरा अरबी शब्द है, जिसे दस नंबर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। तीनों अशरे क्रमश: 10-10 दिनों के होते हैं। पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। रमजान माह के पहले अशरे में मुस्लिमों को ज्यादा से ज्यादा जकात (दान) देकर गरीबों की मदद करनी चाहिए।
यह रहेगा सेहरी व अफ्तार का समयः
अफ्तार,जुमा: शाम 6:50 बजे से
सेहरीः सनीचर: सुबह 4:27 बजे से
अपील
कोरोना का संकट है, इसलिए सभी मुसलमानों भाइयों से अपील है कि वे घर में रहकर अल्लाह की इबादत करें। मस्जिदों में भी केवल 5 लोगों द्वारा ही नमाज अदा की जा रही है। कोरोना के संकट से जूझ रहे गरीब व मजलूमों की रमजान के पाक महीने में हर संभव मदद करें: अब्दुल अजीज कादरी, शहर काजी, ग्वालियर.
