मुस्लिम समुदाय में शादी विवाह में फिजूल खर्ची पर होगी बंदिशें, मुस्लिम समाज के उलेमा हजरात और समाज के लोगों की हुई बैठक में लिए गए निर्णय | New India Times

राकेश यादव, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

मुस्लिम समुदाय में शादी विवाह में फिजूल खर्ची पर होगी बंदिशें, मुस्लिम समाज के उलेमा हजरात और समाज के लोगों की हुई बैठक में लिए गए निर्णय | New India Times

मुस्लिम समुदाय में शादी विवाह जैसे होने वाले आयोजनों में अब फिजूल खर्च करने पर पाबंदी लगाई जा रही है। जिसको लेकर भोपाल, सागर, दमोह जैसे अन्य स्थानों पर मुस्लिम समुदाय के उलेमा हजरात एवं समाज के जिम्मेदार लोगों द्वारा ऐसे निर्णय लेकर समाज को जागरुक किया जा रहा है। भोपाल सागर के बाद अब देवरी नगर में भी शादी विवाह समारोह कार्यक्रम में होने वाली कुछ चीजों पर पाबंदी लगाने के निर्णय लिए गए हैं।

मुस्लिम समुदाय में शादी विवाह में फिजूल खर्ची पर होगी बंदिशें, मुस्लिम समाज के उलेमा हजरात और समाज के लोगों की हुई बैठक में लिए गए निर्णय | New India Times

देवरी नगर के चारों मुहल्लों से एकत्रित हुए मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध नागरिक एवं सामाजिक धर्मगुरुओं की उपस्थिति में नगर की मरकज जामा मस्जिद में गरुवार के दिन इशा की नमाज के बाद एवं शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें उलेमा हजरात के द्वारा शरीयत के मुताल्लिक कार्यक्रम करने की हिदायत दी गई और समाज के लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि भोपाल एवं सागर से यह फतवा जारी किया गया है कि समाज में जहां कहीं भी लड़का या लड़की की शादी समारोह के आयोजन में दहेज की मांग एवं आयोजन में डीजे, बाजे, आतिशबाजी, नाच- गाने एवं अन्य प्रकार के कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। यदि ऐसे कार्यक्रम किये गए तो वहाँ मौलाना हाफिज शादी में निकाह नहीं पढ़ाएंगे और ना ही उस शादी में किसी अन्य जगह के हाफिज मौलाना निकाह पढ़ाने आएंगे। इसी दौरान समाज के लोगों से भी दरखास्त की गई है। कि ऐसे कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे तो समाज के लोग भी इस का बहसकार करें ,और शादी में शरीक ना हो। देवरी नगर के मौलाना हजरातों ने जानकारी देते हुए बताया की इस प्रकार के निर्णय समाज में सभी जगह इसलिए लिए जा रहे हैं। क्यों की यह शरीयत के मुताबिक बताया गया। और शादी विवाह में होने वाले फ़िज़ूल खर्चे से बचा जा सके। और सरियत के मुताबिक हो। बैठक में समाज के सेकड़ो लोग, जिम्मेदार नागरिक एवं समाज के मुखिया सहित उलेमा हजरात की सहमति से यह निर्णय लिए गए जिसे समाज के लोगों द्वारा अमल में लाने की बात कही गई।

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