हिमांशु सक्सेना, ग्वालियर (मप्र), NIT:

स्वर्णरेखा और मुरार नदी में बहने वाले सीवर को रोकने के लिए सालों से बंद पड़ी सीवर लाइनों को खोलने में नगर निगम के कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं। हनुमान बांध से लेकर जलालपुर तक स्वर्णरेखा नदी में सीवर लाइन डाली गई थीं। इनका सालों से संधारण नहीं होने के कारण जाम पड़ी हैं। इनमें से पानी ओवरफ्लो होकर सीधे नदी में बह रहा था। अब वाटर प्लस श्रेणी में स्थान पाने के लिए इन्हें साफ किया जा रहा है।
ग्वालियर नगर निगम ने इस साल स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में वाटर प्लस की कैटगरी के लिए दावेदारी की है। इस कैटगरी में नियम है कि शहर में जितनी भी जल संरचनाएं हैं वह साफ और स्वच्छ होना चाहिए। इनमें किसी भी प्रकार से सीवर व नालों का गंदा पानी नहीं मिलना चाहिए। इसके चलते सीवर लाइन को साफ कर उसमें सीवर का पानी बहाना प्रारंभ किया जा रहा है। फूलबाग गुरुद्वारा से लेकर जलालपुर तक की सात किलोमीटर लंबी सीवर लाइन साफ हो चुकी है। गुरुद्वारे से पहले स्वर्णरेखा नदी में बहकर आने वाला पानी बड़े चैंबर के जरिए सीवर लाइन से जलालपुर पहुंचना प्रारंभ हो गया है।
मिट्टी बहकर जम गई है सीवर लाइनों में

सीवर लाइनों का सफाई नहीं होने के कारण इसके अंदर मिट्टी की गाद, पॉलीथिन जम गई है, जो ठोस रूप में पहुंच गई है। अब इन सीवर लाइन को साफ करने में निगम कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसकी सफाई में लगी मशीनें भी कई जगह फेल हो जाती हैं। ऐसे में सफाई कर्मचारियों को हाथों से सीवर लाइन को खोलने का कार्य करना पड़ता है।
नालों की टैपिंग की जा रही है, इनके पानी को सीवर लाइनों से जोड़ा जा रहा है। इससे उम्मीद की जा रही है कि मुरार और स्वर्णरेखा नदी में सीवर का पानी आना बंद हो जाएगा। इन नदियों में सिर्फ बारिश का पानी ही बहेगा: शिवम वर्मा, निगमायुक्त
