मंदसौर गोली कांड में मारे गए किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए देने की मुख्यमंत्री की घोषणा चली गई खटाई में, मंदसौर कलेक्टर ने इतनी राशि देने से इंकार करते हुए पांसा फिर सरकार के पाले में फेंका | New India Times

संदीप शुक्ला, भोपाल, NIT; ​
मंदसौर गोली कांड में मारे गए किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए देने की मुख्यमंत्री की घोषणा चली गई खटाई में, मंदसौर कलेक्टर ने इतनी राशि देने से इंकार करते हुए पांसा फिर सरकार के पाले में फेंका | New India Times

  • मंदसौर के किसानों को एक-एक करोड़ नहीं दे सकते- कलेक्टर

 किसान आंदोलन के दौरान छह जून को पुलिस फायरिंग में मारे गए मंदसौर के छह किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए देने से कलेक्टर ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर ने अधिकार नहीं होने का हवाला देकर प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। 
किसान आंदोलन के दौरान 6 जून को पुलिस फायरिंग में मारे गए मंदसौर के 6 किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए देने से कलेक्टर ने हाथ खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर ने अधिकार नहीं होने का हवाला देकर प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। मामला गृह विभाग पहुंचा तो वहां भी बजट का संकट खड़ा हो गया। इसके बाद से सीएम की घोषणा फाइलों में उलझी पड़ी है। अब सरकार परेशान है कि इस राशि को किस मद से दे।​
मंदसौर गोली कांड में मारे गए किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए देने की मुख्यमंत्री की घोषणा चली गई खटाई में, मंदसौर कलेक्टर ने इतनी राशि देने से इंकार करते हुए पांसा फिर सरकार के पाले में फेंका | New India Timesसीएम शिवराज सिंह चौहान ने मृत किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। इसके दूसरे दिन सात जून को सीएम सचिवालय से तत्कालीन मंदसौर कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह को चेक जारी करने के लिए कहा गया था। कलेक्टर ने बजट का हवाला दिया तो उन्हें कहा गया था कि फिलहाल राशि जारी की जाए। उसे बाद में दूसरी मदों में समायोजित करें। कलेक्टर ने इसका प्रस्ताव तो बनाया, लेकिन राशि जारी नहीं की।

इसके बाद स्वतंत्र सिंह का तबादला हो गया और ओपी श्रीवास्तव मंदसौर कलेक्टर बन गए। श्रीवास्तव ने सीधे तौर पर इस राशि को जारी करने से किनारा करके इसका प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेज दिया। श्रीवास्तव ने इसका आधार बनाया कि उन्हें इतनी बड़ी राशि देने के अधिकार नहीं है।

इस मामले में सरकार ने वित्त विभाग से भी सलाह ली है। इसके तहत दो रास्ते सुझाए गए हैं। पहला रास्ता सीएम स्वेच्छानुदान के तहत सहायता कोष से मदद कर सकते हैं। इसमें सीएम को अधिकार है, लेकिन सीएम इस पर सहमत नहीं हैं। दूसरा रास्ता गृह विभाग सीएम की घोषणा का है।

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