किसान दिल्ली कूच न कर पायें इसके लिये पुलिस एवं प्रशासन ने उठाए सख्त कदम | New India Times

वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

किसान दिल्ली कूच न कर पायें इसके लिये पुलिस एवं प्रशासन ने उठाए सख्त कदम | New India Times

क्षेत्रीय किसानों में विशेष रूप से सिख किसान 26 जनवरी को दिल्ली कूच न कर पाएं इसके लिये पुलिस एवं प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए गुरुवार से नाकाबंदी की करवाई शुरू करते हुए अभी से कमर कस ली है। गोमती तिराहा जो किसान आन्दोलन का केन्द्र बन गया है सहित लखीमपुर रोड पर अमीर नगर पुलिस चौकी क्षेत्र अन्तर्गत कठिना नदी पुल के पास वैरियर लगा चेकपोस्ट बनाकर वहां पीएसी तैनात कर वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी है। वही उपपुलिस अधीक्षक अभय प्रताप मल, कोतवाल बृजेश त्रिपाठी दलबल के साथ नगर से लेकर पूरे क्षेत्र में भ्रमण कर रहे है।
दिल्ली के साथ पंजाब हरियाणा की भाति मोहम्मदी में भी किसान आन्दोलन अगड़ाई लेने लगा है। गत दिनो पुलिस प्रशासन को चकमा देकर अन्तर्राष्ट्रीय शूटर हरियाणवी किसान बेटी पूनम पण्डित के द्वारा लकहा गुरूद्वारे में हजारो की संख्या में किसानो की महापंचायत सफलता पूर्वक कर लेने से पुलिस प्रशासन की खासी किरकिरी हुई थी। प्रशासन किसानो को अब तक समझाता आया की वो दिल्ली न जाकर यही जो भी करना हो वो कर ले ज्ञापन दे लेकिन दिल्ली न जाये। जबकि पूनम पण्डित किसानो में दिल्ली पहुंचने के लिये जो जोश जगा गयी। उसके आगे प्रशासन का समझना बेकार होते देखकर पुलिस एवं प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की ठान ली। परिणाम स्वरूप क्षेत्र के 300 किसानो को दिल्ली कूच से रोकने के लिये शान्ति भंग करने के आरोप में नोटिस पकड़ा दिया। अब हर किसान को एक लाख रूपये के दो जमानदारो के साथ उपजिलाधिकारी न्यायालय से जमानत करानी होगी। यह कार्यवाही आगामी छः माह के लिये प्रभावी होगी। अगर इस छः माह में ये तीन सौ किसान उलंघन करते है तो इस राशि को उनसे या उनके जमानतदारों से वसूला जायेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस कार्यवाही से किसानो को आन्दोलन एवं दिल्ली कूच से रोका जा सकता है जो सम्भव नहीं दिखता। किसानो का इस कार्यवाही पर कहना है कि प्रशासन की यह कार्यवाही आग में घी डालने जैसी की है। हम न्याय और अपने हक के लिये लड़ रहे है सरकार हमारा उत्पीड़न कर रही है। इसके दूरगामी परिणाम सत्ता पक्ष को भारी पड़ सकते है। क्योकि क्षेत्र के 95 प्रतिशत सिख किसानों सहित स्थानीय किसानों ने लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया था।

किसान दिल्ली कूच न कर पायें इसके लिये पुलिस एवं प्रशासन ने उठाए सख्त कदम | New India Times

(1)
[कोतवाली प्रभारी बृजेश त्रिपाठी का कहना है कि ये कायेवाही अभी कृषि कानून के विरोध में दिल्ली में चल रहे धरने में 26 जनवरी किसानो की होने वाली रैली में भाग लेने जा रहे किसान नेताओ को चिन्हित कर उन्हे अभी सिर्फ नोटिस ही दिया गया है साथ ही उनसे शान्ति व्यवस्था बनाए रखने व दिल्ली न जाने की अपील भी की गयी साथ ही ये भी अपील की जा रही है कि वो अपनी समस्या को स्थानीय स्तर पर ही उठाए, हम सब उच्चाधिकारियो को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराये तथा पुलिस प्रशासन का सहयोग करे।]

(2)
[पचास हजार की जगह एक लाख का हुआ मुचलका पंचायत चुनाव हो या विधानसभा लोकसभा चुनाव अथवा कोई पर्व या धरना प्रर्दशन पर अभी तक पुलिस प्रशासन 50 हजार रूपयो का ही मुचलका भरवा कर जमानत दे दी जाती थी। लेकिन अब 50-50 हजार रूपयो के दो जमानतदारो के मुचलके दाखिल करना होगे तभी जमानत मिलेगी। उपजिलाधिकारी स्वाति शुक्ला का कहना है कि शान्ति भंग में निरूद्ध व्यक्ति को एक लाख रूपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत दी जा रही है। अगर निरूद्ध व्यक्ति इसका उलंघन करेगा तो पूरी जमानत राशि वसूली जायेगी। ये कार्यवाही छः माह तक प्रभावी रहेगी।]

(3)
[ प्रशासन की इस दण्डनात्मक कार्यवाही पर आम किसान दिलबाग सिंह, इन्द्र बहादुर सिंह, परमजीत सिंह, दीप सिंह, प्रेम प्रकाश, राम प्रकाश सिंह, शफीक खां, इदरीस अहमद, रहमान खां, कमाल अहमद, लतीफ अली सहित तमाम कृषको का इस कार्यवाही पर कहना है कि ये शासन प्रशासन की ज्यादती है अभी तक हम किसानो को अन्नदाता कहा जाता था। आज हमसे अपराधियो जैसा व्यववहार किया जा रहा है क्यो ? किसानो को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हडडी कहा जाता है फिर भी ये व्यवहार। इसकी जितनी भी निन्दा की जाये वो कम है।]

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