जयपुर में कांग्रेस ने किसानों की मांगों के समर्थन में किया धरना-प्रदर्शन, धरना स्थल पर सचिन पायलट के समर्थन में बार-बार नारे लगने से मुख्यमंत्री गहलोत नजर आये असहज | New India Times

अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:

जयपुर में कांग्रेस ने किसानों की मांगों के समर्थन में किया धरना-प्रदर्शन, धरना स्थल पर सचिन पायलट के समर्थन में बार-बार नारे लगने से मुख्यमंत्री गहलोत नजर आये असहज | New India Times

दिल्ली की चारों तरफ की सीमाओं पर कृषि सम्बन्धित केंद्र सरकार द्वारा बनाये तीन काले कानून को वापस लेने की मांग को लेकर भारत भर के किसान डेरा डाल कर पिछले लम्बे समय से धरने पर बैठे होने के चलते उनके समर्थन में राजस्थान कांग्रेस द्वारा 3 जनवरी को दोपहर 12 से 4 बजे तक शहीद स्मारक जयपुर पर धरना देने की औपचारिकता पूरी की गई। उक्त धरने में मुख्यमंत्री गहलोत व पूर्व उपमुख्यमंत्री पायलट समेत अनेक विधायक व नेताओं के शिरकत करने के बावजूद मुनासिब भीड़ नही जुटने पर बिछाई गई ग्रीन कारपेट भी खाली रहने से कांग्रेस सरकार की साख पर बट्टा लगना माना जा रहा है। धरने मे सचिन पायलट के आने पर व उनके भाषण पर उनके हक मे बार बार खूब नारे लगे एवं वही मुख्यमंत्री गहलोत के भाषण पर नारे नही लगने पर मुख्यमंत्री ने अपने भाषण मे मीडिया पर भी अपनी भड़ास निकाली। गहलोत व पायलट करीब डेढ घंटे धरने मे साथ साथ बैठे रहे पर आपसी संवाद नहीं हुआ।

जयपुर में कांग्रेस ने किसानों की मांगों के समर्थन में किया धरना-प्रदर्शन, धरना स्थल पर सचिन पायलट के समर्थन में बार-बार नारे लगने से मुख्यमंत्री गहलोत नजर आये असहज | New India Times

कम भीड़ वाले औपचारिक बने कांग्रेस के उक्त सांकेतिक धरने में मुख्यमंत्री गहलोत व पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पर मीडिया व शिरकत करने वाले नेताओं का खास फोकस रहा। धरने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा भी मौजूद थे लेकिन उनपर किसी तरह का फोकस नजर नहीं आया। धरने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत ने कांग्रेस के विधायकों सहित उनकी सरकार को समर्थन दे रहे अन्य विधायकों को रात्रि भोज भी अपने सरकारी आवास पर दिया। भोज में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भी पहुंचे जिनसे वहां मुख्यमंत्री समर्थक अनेक विधायकों को मिलते देखने को राजनीति में अलग से देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर यह है कि कृषि सम्बन्धित तीन काले कानून वापिस लेने की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों के साथ होने को दिखाने के लिये राजस्थान कांग्रेस का सांकेतिक धरने में मुख्यमंत्री गहलोत व पूर्व उपमुख्यमंत्री पायलट की शिरकत के बावजूद आम जनता पर किसी तरह का प्रभाव नहीं छोड़ पाया है। उक्त धरने से मात्र सचिन पायलट की जनता में मुख्यमंत्री गहलोत के मुकाबले स्वीकार्यता बढने का संकेत जरूर मिला है।

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