कासिम खलील, बुलढाणा (महाराष्ट्र), NIT;
संरक्षित जंगल “ज्ञानगंगा अभयारण्य” में अपने पालतू जानवरों को चराना कानूनी रूप से अपराध होने के बावजूद अभयारण्य से सटे देहातों के लोग अपने बैल ,गाय,भैंस एवं भेड़-बकरियां बेझिझक अभयारण्य में चराने के लिए ले जाते हैं जिससे अभयारण्य की मूल्यवान वन संपदा तो नष्ट होती ही है साथ ही वन्यजीवों के अधिवास में भी खलल पैदा होता है। इस संरक्षित जंगल में बेख़ौफ़ हो रही वन चराई को रोकने के लिए अमरावती वन्यजीव विभाग के सीसीएफ एम. एस. रेड्डी ने कड़ा रूख अपनाते हुए सभी वन कर्मियों को निर्देशित किया था कि वह अभयारण्य में आने वाले मवेशियों को जब्त करते हुए पशुपालकों पर कार्यवाही करें। इसी कड़ी में कल 6 जून को खामगांव रेंज के कर्मियों ने 164 भेड़-बकरियों को पकड़ते हुए एक आरोपी को भी हिरासत में लिया है। इस धडाकेबाज कारवाई के बाद पशुपालकों में दहशत देखी जा रही है।
बुलढाणा जिले की 4 तहसीलों की सीमा में फैला हुआ “ज्ञानगंगा अभयारण्य” जिले का वैभव है अभयारण्य में अनेक प्रकार के हिंस्त्र व शाकाहारी जीवो का बसेरा है, जबकि सागवान,अंजन,पलस जैसे मूल्यवान पेड़ एवम कई प्रकार की घास मौजूद है. अभयारण्य के अतराफ में करीब 33 गांव है. वन्य जीव विभाग की आंखों में धूल झोंककर या फिर वनकर्मियों को डरा धमका कर अतराफ़ के देहातों के पशुपालक अपने मवेशी एवम भेड़-बकरियां अभयारण्य में चराते हैं जिसके कारण अभयारण्य को काफी नुकसान होता है. कल 6 जून को ज्ञानगंगा अभयारण्य की खामगांव रेंज अंतर्गत के चिंचखेड बिट में स्थित कंपार्टमेंट नंबर 269 में भेड़-बकरियां चराई जा रही हैं। इसकी जानकारी मिलने के बाद वनपाल ए.एस. विनकर व वनरक्षक संतोष शिंदे जंगल में पहुंचे और सभी 164 भेड़-बकरियों को जप्त कर लिया तथा तत्काल अन्य कर्मियों को अपनी मदद के लिए बुलाया। इस संबंध में पशुपालक आरोपी शामा चीमा शिंदे (21) निवासी पिंपलगांव नाथ के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की कलम 26 की उपकलम क, ड तथा वन्य वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की कलम 27,29 के तहत अपराध दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। ज़ब्त जानवरों में 152 भेड व 12 बकरियां शामिल हैं। वन्य जीव विभाग द्वारा की गई इस जोरदार कार्रवाई के बाद ज्ञानगंगा अभयारण्य में अपने मवेशी चराने वाले पशुपालकों में भय और दहशत का माहौल फैल गया है। इस कार्रवाई के बाद अब ऐसा लग रहा है कि पशुपालक अपने मवेशी ज्ञानगंगा अभयारण्य में चराने के लिए नहीं लेकर जाएंगे। इस कार्रवाई को अमरावती सीसीएफ एम.एस.रेड्डी व डीएफओ प्रमोदचन्द लाकरा के मार्गदर्शन में प्रभारी आरएफओ पी.जी.सानप के नेतृत्व में अंजाम दिया गया है जिसमें पुर्व सैनिक ससाने, गवई, पवार, झीने व मिसाल सहित बोथा वन्यजीव समिति का विशेष सहकार्य मिला। जब्त किये गए जानवरों को सरकार जमा करने की तैयारी में वन्यजीव विभाग जुट गया है।
- अभयारण्य में तीन सागवान चोर पकड़े
ज्ञानगंगा अभयारण्य बुलढाणा शहर से सटा हुआ है। इस जंगल में बड़ी मात्रा में मौल्यवान सागवान के पेड मौजूद हैं। इस प्रतिबंधित जंगल में प्रवेश नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद कुछ सागवान तस्कर वनकर्मियों की आंख बचा कर जंगल में प्रवेश करते हैं और सागवान के खड़े पेड़ों को गिराकर उसे गांव , शहर में लाकर बेचते है। 5 जून को वन्यजीव विभाग के कर्मियों ने तीन सागवान चोरों को गिरफ्तार कर लिया है जिनके पास से सागौन की लकड़ियां भी बरामद की गई है।
ज्ञानगंगा अभयारण्य की बुलढाणा रेंज अंतर्गत की तोपखाना बीट के कंपार्टमेंट नंबर 316 में तीन चोरों ने सागौन के खड़े झाड़ों को गिराकर उसकी लकड़ी लेकर फरार हो गए जंगल में गश्त कर रहे वनपाल सुधाकर घोंगे एवं वनरक्षक बाजीराव पवार को यह चोर अपने कंधे पर सागवान की लकडिया लेकर जाते हुए नजर आए जिनका पीछा कर दोनों कर्मियों ने इन तीन चोरों को पकड़ लिया. इस संबंध में आरोपी सागवान चोर शे. जब्बार शे. सत्तार (42) इकबाल नगर बुलढाणा, अमर रिजवान शे. मोहम्मद (30) गवली पुरा बुलढाणा, तथा सै.आसिफ सै. सलीम (34) तेलुगु नगर बुलढाणा के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम 1927 की कलम 26(1), 37(फ),61 तथा वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 की कलम 27, 29, 31 के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है. इन तीनों आरोपियों के पास से तीन सागवान की लकड़ियां कीमत ₹5250 जप्त की गई है. आरोपियों को कोर्ट में खड़ा किया जाने पर उन्हें कोर्ट ने जमानत दे दी है. मामले की अधिक जांच प्रभारी आरएफओ शिंदे के मार्गदर्शन में वनपाल घोंगे कर रहे हैं.
कैप्शन-अभयारण्य से सागौन चुरानेवाले 3 चोरो को वन्यजीव कर्मियों ने गिरफ्ता किया।
