वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

इंडो-नेपाल बॉर्डर पर भारतीय क्षेत्रों से नई तस्करी शुरू हो गई है। सूत्रों से पता चला है कि भारतीय बॉर्डर क्षेत्र से लगभग तमाम ऐसे रास्ते हैं जिन पर गन्ने की भरपूर तरीके से तस्करी की जा रही है जिसमें देखा जा सकता है कि पास पड़ोस के सेंटरों पर इसका खासा असर पड़ता नजर आ रहा है। वहीं लोगों ने भी बताया है कि जिस तरह से नेपाल में नगद गन्ना खरीदने का रूटीन बनाया गया है उससे बॉर्डर के करीब क्षेत्रों में कुछ तस्कर इसी कामों में लगे हुए हैं जो गन्ना नेपाल भेजने के लिए नगद पैसे लेकर जगह-जगह खरीदने के लिए बैठे हुए हैं। कई किसानों ने नाम ना छापने की शर्त पर अपनी-अपनी राय दी है और कहा की बसही व टिल्ला नंबर 4 बॉर्डर से जिस तरह से लगातार गन्ने भरी दर्जनों ट्रालियां रोजाना भरकर नेपाल पहुंचाया जा रहा है उससे भारतीय चीनी मिलों पर भी इसका खासा असर देखने को मिलेगा। वहीं अगर बात करें बॉर्डर पर बैठे सुरक्षाकर्मियों की तो आखिर कौन सी ऐसी गश्त चल रही है जो इतनी भारी-भरकम गन्नों से भरी ट्रालियां पार हो रही हैं और सुरक्षाकर्मियों को भनक तक नहीं लग रही है। इस पर संदेह भी जताया जा रहा है कि कहीं ऐसा ना हो की बॉर्डर पर बैठे कुछ तस्कर पैसों का लालच दिखाकर इन कामों को अंजाम दे रहे हैं। एक अंदेशा यह भी लगाया जा रहा है कि बॉर्डर पर जिस तरह से आए दिन गतिविधियां बनी रहती हैं और तस्कर बॉर्डर की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं उससे आने वाले मुसीबत और भी ताजा होती जा रही है यहां तक कि एक किसान ने बताया कि नेपाल में ₹240 के हिसाब से गन्ना खरीद की जा रही है और भी खुलासे करते हुए कहा कि खेत से खरीदने पर 230 व 235 का हिसाब मिलता है और अगर भर कर बॉर्डर के पास पहुंचाएं तो 240 व 245 का खरीद रेट नगद के हिसाब से होता है। इसी पर पूछा कि किन किन रास्तों से यह काम किया जाता है तो किसान ने बताया कि तिल्ला नंबर 4 से सैकड़ों ट्राली ट्रैक्टर रोजाना खड़ी रहती हैं नेपाल पार होने के लिए और तो और बसई कमलापुरी जैसे अन्य रास्तों से भी गुपचुप तरीके से निकाला जाता है जो इन तस्करों के लिए काफी महफूज साबित होता है। अब देखना यह है कि इन तस्करों पर विभागीय अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं जिनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं जिससे नई-नई तस्करी को भारतीय बॉर्डर पर अंजाम दिया जा रहा है।
