साबिर खान, मीरा-भाईंदर/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

मीरा-भाईंदर महानगरपालिका में साडे तीन साल के बाद अवैध व ग़ैरक़ानूनी तरीके से होने जा रही मनोनीत नगरसेवक की नियुक्ति पर रोक लगाकर दोबारा प्रक्रिया कराने के लिए मुंबई हाईकोर्ट में दाखिल हुई याचिका पर शुक्रवार को मुंबई हाईकोर्ट ने स्टे ॲार्डर दे दिया है जिससे अब पुरी प्रक्रिया पर ही रोक लग गई है। मीरा भाईंदर के निवासी समाजसेवी श्री नितेश मुणगेकर ने मुंबई हाईकोर्ट के वकील एडवोकेट पी एस गोले द्वारा उनके सीनियर हाईकोर्ट के काउंसिलर एडवोकेट संदेश पाटिल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे हाईकोर्ट के जस्टिस श्री काथावाला व श्री छागला के बेंच ने स्विकार करते हए मनपा की महासभा में आननफानन में 7 दिसंबर को बहुमत के जोर पर पास किये गये मनोनीत नगरसेवकों के प्रस्ताव पर रोक लगा दी।याचिकाकर्ता के मुंबई हाईकोर्ट के सीनियर काउंसिलर एडवोकेट संदेश पाटिल के मुताबिक़ मीरा-भाईंदर महाराष्ट्र मनपा अधिनियम 1949 व मनोनीत सदस्य की नियुक्ति नियम 2012 की धारा 4 में साफ़ तौर पर कहा गया है कि मनपा में समाज के प्रतिष्ठित विशेष ज्ञान रखने वाले व जो पिछले पाँच साल से मनपा क्षेत्र में कार्यरत हैं ऐसे एडवोकेट, प्रोफ़ेसर, सीए, उपायुक्त, अधिकार व एनजीओ के पदाधिकारियों को मनोनीत नगरसेवक बनाना चाहिए लेकिन मीरा-भाईंदर मनपा आयुक्त ने एनजीओ की चैरिटी कमिश्नर से जॉंच कराये बगैर ही 6 उम्मीदवार का फ़ॉर्म राजनीतिक दबाव में आकर मंजुर किये हैं जो पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी व अवैध है। बताया जाता है कि इन उम्मीदवारों में एक तो ठेकेदार है तो कई पर भ्रष्टाचार व पार्टी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने व काम करने का आरोप है। सुत्रों ने बताया कि मनपा आयुक्त ने मनोनीत नगरसेवक बनाये जाने की सुचना जानबूझकर राजनीतिक दबाव में आकर किसी भी बड़े हिंदी, मराठी, इंग्लिश आदि लोकप्रिय दैनिक अख़बारों में नहीं देकर केवल एक ही अनजाने परशुराम समाचार नामक पेपर में देने की वजह से पूरी प्रक्रिया शक के दायरे में आ गई है जिससे आम नागरिकों को मनोनीत नगरसेवकों की नियुक्ती प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी और जो हकदार हैं वे जानकारी के अभाव में प्रक्रिया से वंचित रह गये। बताया जाता है कि मनोनीत नगरसेवक में ग़ैरराजनीतिक व समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को ही जाना चाहिए लेकिन मनपा आयुक्त ने किसी भी उम्मीदवार की उचित जॉंच नहीं की है जिसके वजह से गलत व्यक्तियों को राजनीतिक दबाव के चलते मौका मिलेगा और जो हकदार है वो इससे वंचित रह जायेंगे। ग़ौरतलब है कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता भाजपा के गैरकानुनी व मनमाना तरीके से काम करने की आदत से तंग आकर भाजपा छोड़कर शिवसेना में शामिल हुई अपक्ष विधायक गीता जैन भी शिवसेना के उम्मीदवार को मनोनीत नगरसेवक नहीं बनाने पर भाजपा के तीन नगरसेवकों समेत चार नगरसेवक बनाये जाने पर महासभा के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से स्थगन आदेश लाया था लेकिन अब मुंबई हाईकोर्ट ने इन सभी विषयों का सज्ञान लेते हुए ही स्टे ॲार्डर दिया है जिससे अब राज्य सरकार के यहाॅं होने वाली सुनवाई भी अधर में लटकने की संभावना है।याचिकाकर्ता का कहना था कि मनोनीत सदस्य के उम्मीदवार मनपा कानून के मुताबिक़ पात्र नहीं है और राजनीतिक दबाव में आकर मनपा आयुक्त ने उनको ग़ैरक़ानूनी ढंग से उनके फ़ॉर्म स्विकृत किये हैं। बताया जाता है कि बीजेपी की ओर से सोहन सिंह राजपूत, अनिल भोसले, अजित पाटिल, भगवती शर्मा व शिवसेना ने विक्रम प्रताप व कांग्रेस एस ए खान आदि सिर्फ़ 6 उम्मीदवारों ने फ़ॉर्म भरा था। चर्चा है कि भाजपा से सोहन सिंह ने आर्थिकरूप से सेंटिंग करके अपना नामांकन वापस लेकर गांव राजस्थान चले गये जबकि शिवसेना के उम्मीदवार से पूर्व विधायक मेहता बैर होने की वजह से उन्हें ठेकेदार बताकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। याचिकाकर्ता के वकिल ने हाईकोर्ट से मांग करते हुए कहा है कि मनोनीत नगरसेवक की पूरी प्रक्रिया रद्द करते हुए फिर से दोबारा प्रक्रिया करते हुए बड़े अख़बारों में उसकी जानकारी आम जनता को दें ताकि सही और हक़दार प्रतिष्ठित ग़ैरराजनीतिक व्यक्ति मनपा कानुन के मुताबिक़ मनपा सदन में जाकर मनपा को फायदा पहुंचा सकें और जनहित में काम कर सकें।राज्य सरकार के स्थगन आदेश के बाद मुंबई हाईकोर्ट के स्टे ॲार्डर से धांधली व गैरकानूनी बिना जाॅंच की गई मनोनीत नगरसेवक की सारी प्रक्रिया शक के दायरे में आ गई है। हाईकोर्ट के इस निर्णय से लोगों में खुशी है और गलत लोगों के सदन में जाने पर रोक लगने से बुद्धीजिवियों ने भी राहत की सांस ली है।
