मेहलका अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशानुसार केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2019- 2020 के परिणामों की घोषणा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करते हुए बताया कि सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर बुरहानपुर ने 14 वीं रैंक प्राप्त की है एवं प्रदेश स्तर पर बुरहानपुर में तीसरे नंबर की रैंक प्राप्त की है। इंदौर ने इस बार भी बाज़ी मार कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह ने नगर पालिक निगम बुरहानपुर के जिम्मेदार अधिकारियों को बधाई दी है। निवृत्त मान महापौर एवं निवृत्तमान अध्यक्ष ने स्वच्छता सर्वेक्षण में बुरहानपुर को मिली सफलता पर अपने विचार रखते हुए दोनों ने इसका श्रेय नगर पालिक निगम बुरहानपुर के आयुक्त सहित निगम कर्मियों के साथ जनता की जागरूकता और जनता के सहयोग के कारण यह संभव हो सका है। पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस दीदी ने भी नहले पर दहला मारते हुए नगर पालिक निगम जाकर आयुक्त सहित अधिकारियों का सम्मान किया एवं उन्हें बधाई दी।

सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। इस उपलब्धि पर जहां बड़े-बड़े फ्लेक्स होल्डिंग नगर में दिखाई दे रहे हैं और प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी, पूर्व महापौर, पूर्व निगम अध्यक्ष इसकी क्रेडिट लेने के प्रयास कर रहे हैं।

वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से लोग सर्वे पर भी प्रश्न चिन्ह लगाकर सफाई अव्यवस्थाओं का फ़ोटो सोशल मीडिया के माध्यम से डालकर इस की ज़ीरो ग्राउंड रिपोर्ट का आईना सोशल मीडिया के माध्यम से बताया जा रहा है, वही दैनिक समाचार पत्रों ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है। वाल्मीकि संगठन बुरहानपुर ने भी श्रेय लेने की होड़ पर अपनी बात रखते हुए वाल्मीकि संगठन के संस्थापक एवं अध्यक्ष उमेश जंगल में भी प्रेस नोट के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर एवं प्रदेश स्तर पर जो सफलता प्राप्त हुई है उसकी क्रेडिट सिर्फ और सिर्फ सफाई कर्मचारियों को ही जाती है। यह उनकी दिन-रात की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि एयर कंडीशन में बैठकर आदेश देने वाले अधिकारियों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। वाल्मीकि संगठन में जीरो ग्राउंड पर और फील्ड पर काम करने वाले अपने सफाई कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हुए उनका स्वागत एवं सम्मान भी किया है और शासन द्वारा ठेका पद्धति के औचित्य पर भी सवाल उठाए हैं और बताया है कि इससे सफाई कर्मचारियों का शोषण हो रहा है और इस शोषण को बंद करने की अपील वाल्मीकि संगठन ने शासन से की है।
