अली अब्बास, मथुरा/लखनऊ (यूपी), NIT:

मथुरा में दयाल परिवार गंगा-यमुना तहजीब को अकेले ही जिंदा रखे हुए था। एक ऐसी महिला जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब, मजलूम, बेसहारा, विधवा महिलाओं और बालिकाओं के लिए अर्पित कर दिया। प्रभु दयाल जी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती जौयस दयाल मिलकर पिछले 25 साल से ऐसी शोषित महिलाओं और लड़कियों के लिए काम कर रहे थे जो विधवा हैं, जिनके परिवार टूट गए हैं या जो अत्यंत गरीब हैं। ऐसी शोषित व बेसहारा बालिकाओं और महिलाओं को समाज में आत्मनिर्भर बनाने के लिए दयाल दंपत्ति के द्वारा उन्हें सिलाई, कढ़ाई, बुनाई का प्रशिक्षण अपने घर मिशन कंपाउंड कृष्णा पुरी मथुरा पर सदभावना सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र के नाम से 1995 से लगातार निःशुल्क दिया जा रहा है और अब तक हजारों की संख्या में बालिकाएं और महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त करके स्वावलंबी बन चुकी हैं। प्रशिक्षण उपरांत उन्हें आत्मनिर्भर बनाने व प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को सद्भावना प्रशिक्षण केन्द्र के वार्षिक उत्सव के दौरान समाज के सभी धर्मों के लोगों को इकट्ठा करके एक भव्य कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं और बालिकाओं को निःशुल्क सिलाई मशीन दी जाती रही है ताकि आत्मनिर्भर होकर वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके लेकिन 3 अगस्त 2019 अचानक हृदय गति रुक जाने के कारण प्रभु दयाल जी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी श्रीमती जौयस दयाल के द्वारा महिलाओं और लड़कियों को प्रशिक्षण देने का क्रम जारी रखा। श्रीमती जौयस दयाल ब्लैक स्टोन गर्ल्स इंटर कॉलेज में अध्यापिका थी और सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने शिक्षा देने का काम नहीं छोड़ा। उन्होंने अपना पूरा जीवन अर्पित कर दिया। उनके दुनिया को अलविदा कहने से वहां पूरा माहौल शोक के सागर में डूब गया है और लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनके पीछे उनके पुत्र समाजसेवी मनीष दयाल और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती आभा दयाल रह गए हैं।
