अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT;

राजस्थान विधान सभा में प्रश्नकाल के दौरान प्रतिपक्ष सदस्यों को मौका नहीं देने के मुद्दे को लेकर हुए जोरदार हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल के आदेश पर मार्शलों ने नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी सहित अन्य हंगामा कर रहे प्रतिपक्ष सदस्यों को उठाकर सदन से बाहर निकाल दिया। अध्यक्ष ने हंगामे को देखते हुए सदन की बैठक एक घंटे के लिए स्थगित कर दी।
अध्यक्ष के आदेश पर सुरक्षाकर्मियों ने सबसे पहले कांग्रेस के गोविन्द डोटासरा और बाद में एक एक कर बाकी प्रतिपक्ष सदस्यों को सदन से निकाला। इस दौरान कांग्रेस के धीरज गुर्जर, बसपा के मनोज न्यांगली समेत चार प्रतिपक्ष सदस्यों की सुरक्षाकर्मियों से हल्की झड़प भी हुई। कांग्रेस की शकुंतला रावत को भी महिला सुरक्षाकर्मी बिना किसी खास विरोध के सदन से बाहर ले गयीं। इस दौरान अध्यक्ष कैलाश मेघवाल सदन में ही मौजूद थे। इससे पूर्व अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि कुछ हुड़दंगी विधायक बिना किसी कारण आसन के समक्ष आकर हंगामा करते हैं। मैं सदन में इनकी दादागिरी चलने नहीं दूंगा। उन्होंने हंगामा कर रहे प्रतिपक्ष सदस्यों को कड़े शब्दों का इस्तमाल करते हुए अपने स्थान पर जाने के निर्देश दिये। नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने आरोप लगाते कहा कि सत्ता पक्ष आम जन की आवाज़ उठाने वाले विपक्ष की आवाज दबा कर प्रदेश के आम अवाम की आवाज को दबाना चाहता है यह सहन नहीं करेंगे। इससे पहले मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने इन चोदाह विधायको को सदन से एक साल के लिये निलंबित करने का प्रस्ताव रखा।
निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने समय नहीं देने की मांग पर अपना विरोध दर्ज करवाते वेल में आ गए और प्रश्नकाल सूचि फाड़ कर फेंक दी वही बसपा के मनोज न्यांगली ने भी सत्ता पक्ष पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया ।
गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश फिर राजस्थान और अब दिल्ली में हुई हार की झेप मिटाने के लिए यह लोग (कांग्रेस सदस्य) बेवजह हंगामा कर सदन का समय खराब कर रहे हैं।
संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ समेत सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने प्रतिपक्ष सदस्यों पर बेवजह हंगामा कर सदन का समय खराब करने और सदन के नियमों और परम्पराओं का जानबूझकर उल्लंघन करने के आरोप लगाया । दुसरी तरफ इन विधायको के निलम्बन को अनेक लोग लोकतंत्र का अपमान बता रहे है।
