रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मुस्लिम समाज में सुन्नत अक़ीदे से जुड़े समाज जनों ने परम्परागत व मन्नत अनुसार इस्लामी तारीख 22 रज्जब बुधवार को कुंडे का पर्व मनाया गया। उक्त त्यौहार हजरत इमाम जाफर सादिक रजीउल्लाह की स्मृति में मनाया जाता है।

मिट्टी के कटोरे नुमा बर्तन को कुडे कहते हैं। पर्व के दौरान परम्परागत व मन्नत अनुसार उक्त कुण्डे में रात्रि में खीर पूड़ी मिठाईया आदि बनाई जाती है व पारम्परिक के साथ एक ही स्थान पर बैठे कर समाज जन व परिजनों को ऊक्त न्याज फातिया लगा कर खिलाई जाती है।
इस पर्व का वैज्ञानिक तर्क भी हैं शीतल भोजन गर्मी के सन्धिकाल में ग्रह करना व ऋतु परिवर्तन अनुसार खान पान में ध्यान रखना भी ऊक्त पर्व का उद्देश्य है। कई मुस्लिम घरों में कुण्डे सजाए गए व ईद की तरह बच्चों में भी उत्साह देखा गया शाकाहार व सद्भावना का संदेश इस छोटे से पर्व में देखने को मिला।
