दुनियां के किसी कोने में व्यक्ति की पहचान कानून (संविधान) से पहले एक मानव; दोषी करार न होने तक व्यक्ति को निर्दोष : मो. तारिक  | New India Times

मोहम्मद तारिक, भोपाल, NIT; ​दुनियां के किसी कोने में व्यक्ति की पहचान कानून (संविधान) से पहले एक मानव; दोषी करार न होने तक व्यक्ति को निर्दोष : मो. तारिक  | New India Timesविश्व भर में मानव के हितों को संरक्षित करने 10 दिसंबर 1948 को वर्ल्ड ह्यूमन राइट डे मनाया जाता है। 1950 में यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में ऐलान के साथ इस दिन की शुरुआत हुई थी ! 1948 में 10 दिसंबर को ही यूनाइटेड नेशन में मानवाधिकार पर एक डिक्लेरेशन जारी किया गया था जो आम इंसान के अधिकारों के बारे में बताता है ! मानव अधिकार से अर्थात समानता स्वतंत्रता और शिक्षा जैसे उन मौलिक अधिकारों से है जिसके हकदार दुनिया के सभी इंसान हैं।

  पीस इंडिया मध्यप्रदेश के नव-नियुक्त अध्यक्ष मो. तारिक ने अप्सरा रेस्टोरेंट टैगोर हाल में अपने साथियों सहित केक काटकर मानव अधिकार एवं पीस इंडिया संस्था का जन्मदिन हर्षोल्लास से मनाया !

  पीस इंडिया के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में बताया कि दुनिया में सभी मानव गरिमा और अधिकार के मामले में स्वतंत्रता और समानता है ! हर मानव बिना किसी भेदभाव के सभी तरह के अधिकार और स्वतंत्रता दी गई है ! जिसमें जाति, रंग, लिंग, भाषा, धर्म, राजनीतिक या अंय विचार राष्ट्रीयता, संपत्ति, समाज जैसी बातों को लेकर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता है ! मानव अधिकार में हम मनुष्य के पास जीवन, सवतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार है ! हर मानव को यातना, प्रतावना और क्रूरता से आजादी का अधिकार हासिल है ! किसी भी मानव को गुलामी या दास्तां में नहीं रखा जा सकता है !

   दुनिया के किसी कोने में व्यक्ति की पहचान कानून (संविधान) से पहले एक मानव के तौर पर है ! कानून के सामने सभी बराबर हैं ! और हर मानव को सुरक्षा का समान अधिकार हासिल है ! सभी के पास एक स्वतंत्र और निष्पक्ष अदालत के माध्यम से सार्वजनिक सुनवाई का अधिकार है ! कोर्ट की ओर से दोषी करार ना होने तक व्यक्ति को निर्दोष ही माना जाएगा ! 

 हर मानव को जाति, राष्ट्रीय, धर्म की रुकावटों से दूर शादी करने का अधिकार है ! परिवार बनाने का अधिकार है ! हर मानव को राष्ट्र विशेष की नागरिकता का अधिकार है ! किसी से भी मनमाने तरीके से उसकी राष्ट्रीयता छीनी नहीं जा सकती है !

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कोई उरूज दे न ज़वाल दे !

मुझे सिर्फ इतना कमाल दे !

मुझे अपनी राह में डाल दे !

की ज़माना मेरी मिसाल दे !!
तेरी रहमतो का नूज़ूल हो !

मुझे रहमतो का सिला मिले !

मुझे माल ओ ज़र की हवाज़ न हो !

मुझे तू बस रिज़्के हलाल दे !!
मेरे ज़हन में तेरी फिक्र हो !

मेरी सांस में तेरा ज़िक्र हो !

तेरा ख़ौफ़ मेरी निजात हो !

सभी ख़ौफ़ दिल से निकल दे !!
तेरी बारगाह में ऐ खुदा !

मेरी रोज़ ओ शब है बस येही दुआ !

तू रहीम है तू करीम है !

मूझे मुश्किलों से निकल दे !!

                         “अब तो वैचारिक द्वंद हैं ”

                     @मो. तारिक (स्वतंत्र लेखक)

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