अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान की राजनीति में जाट नेताओं की हर दल में हर स्तर पर महत्वपूर्ण सकारात्मक भूमिका रहने के बावजूद इन दिनों राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल व राजस्थान सरकार के राजस्व मंत्री हरीश चोधरी के मध्य शब्दबाणी तलवारें खींचने से प्रदेश को राजनीति का अलग रुप देखने को मिल रहा है जो काफी चिंताजनक व जाट राजनीति को अघात पहुंचाने वाला ही माना जायेगा।
रालोपा नेता सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा 8 फरवरी को नागौर में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान के मंत्री हरीश चौधरी पर उनके बाडमेर दौरे के समय कार पर हमला कराने का आरोप जड़ते हुये कहा कि मंत्री हरीश चौधरी को लोग दौड़ा दौड़ा कर पीटेंगे जिसके लिये जगह व समय वो तय करेंगे। बेनीवाल के हरीश चौधरी के लिये चेतावनी व धमकी भरे शब्दबाण चलाने के बाद दोनों नेताओं के मध्य मतभेद के हालात बनने से प्रदेश की जनता खासतौर पर जाट समुदाय में उक्त मुद्दे को लेकर चींता के हालात नजर आने लगे हैं।
भाजपा व निर्दलीय के बाद स्वयं की बनाई राजनीतिक पार्टी रालोपा के बोतल चुनाव चिन्ह पर विधायक का चुनाव जीतने के बाद भाजपा से गठबंधन करके नागौर से सांसद बनने वाले हनुमान चौधरी का क्षेत्र में अपना एक राजनीतिक प्रभाव कायम होने के कारण उनके स्वयं के सांसद होने के अलावा तीन विधायक भी उनके दल के है। इसके विपरीत बाडमेर से कांग्रेस के निशान पर पहले सांसद रहे हरीश चोधरी के वर्तमान मे विधायक के साथ साथ राजस्थान सरकार मे राजस्व मंत्री होने के अलावा उनके गांधी परिवार से निकटता होने के चलते उनका भी क्षेत्र मे अच्छा खासा राजनीतिक प्रभाव नजर आता है।
कुल मिलाकर यह है कि मारवाड़ के सांसद हनुमान बेनीवाल व मंत्री हरीश चोधरी जैसे दिग्गज दो जाट नेताओं मे राजनीतिक वर्चस्व की आपसी जंग अगर लम्बी खींचती है तो राजस्थान की जाट राजनीति को आघात पहुंचना तय है। समय रहते आपसी सूलह का रास्ता नही निकला तो क्षेत्र की राजनीति मे एक नया रुप देखने को मिल सकता है।
