अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

रोशन बाग मंसूर अली पार्क में 55 दिनों से महिलाओं का 24 घंटे सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में
आज वकीलों का एक प्रतिनिधीमण्डल रोशन बाग प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया। महिलाओं को सम्बोधित करते हुए एडवोकेट हाईकोर्ट राजेंद्र सिंह जी ने कहा कि जिन लोगों को प्रशासन द्वारा नोटिस भिजवाया जा रहा है हम इसका कल जवाब देंगे और हम खुद पूछेंगे की कौन सी शांति भंग हुई शहर में जो शांति भंग का मुकदमा आम नागरिकों पर लगाया जा रहा है शांति पूर्वक यह धरना चल रहा है इसलिए हम प्रशासन के अधिकारियों से यह अपील करना चाहते हैं कि वह इसको शांति से चलने दें, यह जनता का अधिकार है विरोध करना और सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि विरोध करने का हक है जनता को और महिलाओं से कहा कि आप लोगों को डरने और घबराने की जरूरत नहीं है।
इसी कड़ी में एडवोकेट काशान सिद्दीकी ने कहा की नागरिक्ता संशोधन कानून सी ए ए क्या है इस कानून के अनुसार अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के वे लोग जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत की धरती पर आ गए थे उन सभी को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी इसमें एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून में कहीं भी धार्मिक प्रताड़ना की बात नहीं लिखी है जबकि प्रचारित यही किया जा रहा है कि यह लोग क्योंकि इन देशों में प्रताड़ित किए गए हैं इसलिए हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम इन्हें नागरिकता दें तो ठीक है गवर्नमेंट नागरिकता दे इस कानून पर पहला सवाल यह है इसमें कुछ धर्मों के नाम लिए गए हैं पर जिस धर्म का नाम नहीं लिया गया है उस धर्म के मानने वाले लोगों के लिए नागरिकता संशोधन कानून सीएए में क्या प्रावधान है? दूसरा इन देशों के अलावा दूसरे पड़ोसी देशों जैसे म्यानमार, श्रीलंका आदि का जिक्र क्यों नहीं है? श्रीलंका के तमिलों को क्यों भारत सरकार की यह करुणा हासिल नहीं है? म्यानमार के बेदखल बेघर बार रोहिंग्या किया उनकी पीड़ा, अफगानिस्तान के हजारा, पाकिस्तान में अहमदिया और शिया मुसलमानों के उत्पीड़न से इस सरकार का दिल क्यों नहीं पसीजता?
उत्पला शुक्ला ने कहा कि आप अपने आंदोलन को इसी तरह से शांति पूर्वक चलाइए, आपका आंदोलन एक मिसाल है शांति का जो भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ और इसी तरह से हम इस आंदोलन को उस वक्त तक चलाएंगे जब तक की यह गवर्नमेंट झुक नहीं जाती जो कहते हैं हमें 1 इंच पीछे नहीं हटेंगे उनको कई हजार इंच पीछे हटना पड़ेगा।
मुख्य रूप से एडवोकेट हाई कोर्ट जर्रार खान, शमशुल इस्लाम, नौशाद सिद्दीकी, नाथूराम बौद्ध, अविनाश मिश्रा समेत सैकड़ों अधिवक्ताओं ने धरनारत महिलाओं को समर्थन देते हुए प्रशासन द्वारा धरनारत लोगों को नोटिस को तत्काल वापिस लेने की मांग की अन्यथा अधिवक्ता सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे।
धरने का संचालन सायरा आहमद ने किया। धरने में ज़ीशान रहमानी, निशू, फात्मा, इरशाद उल्ला, सै०मो० अस्करी, अफसर महमूद, इफ्तेखार अहमद मंदर, फज़ल खान, मो०शहाब, शोऐब अन्सारी आदि ने भी प्रोटेस्ट में शामिल महिलाओं को सम्बोधित किया।
