अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

संयुक्त व्यापार मण्डल ने बैठक कर दिल्ली में साम्प्रदायिक हिंसा के शिकार हुए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस प्रकार के जघन्य अपराध पर सख्त कदम उठाए जाने की बात कहते हुए केन्द्र सरकार से लोगों के तबाह हो चूके व्यापार को पुनर्जिवन देने के लिए उचित मुआवज़ा देने की मांग की ताकि दंगे की भेंट चढ़े कारोबारियों को अपना व्यवसाय पुनाः शुरु करने के लिए दर दर भटकना ना पड़े।सिविल लाईन्स कार्यालय पर जुटे व्यापारीयों की बैठक की अध्यक्षता संयुक्त व्यापार मण्डल के महानगर अध्यक्ष सैय्यद मो० अस्करी ने की। उन्होंने कि कहा देश में इस वक्त हालात बहुत बुरे चल रहे हैं लेकिन हमें एक जुट होकर देश में फैले नफरत के बवण्डर को मुहब्बत के पैग़ाम से खत्म करना होगा। दंगा करने वालों का कोई मज़हब और जात नहीं होता, इनको उकसा कर राजनितिक रोटी सेंकने वाले अपने फायदे और वोट की राजनीत के लिए शंतरंजी चाल चलने में मोहरे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं जिनका मक़सद सिर्फ अमन में खलल पैदा करना होता है। मनोज वर्मा ने बैठक का संचालन करते हुए दंगाईयों के साथ सख्त क़दम उठाने और दिल्ली के साथ अन्य प्रदेश व शहरों में सतर्कता बढ़ाए जाने के साथ अपना सब कुछ गवां चुके लोगों के पुनर्वास के लिए उचित क़दम उठाए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा और एआईएमआईएम नेता वारिस पठान पर देशद्रोह का मुक़दमा क़ायम कर जेल भेजा जाए जिसकी ज़हरीली वाणी के कारण यह दंगा हुआ। विवेक सिंह ने कहा हम सब देश में अमन चाहते हैं और कुछ विकृत मांसिक्ता के लोग हमारे देश की साझा संस्कृतिक विरासत को तहस नहस करना चाहते हैं लेकिन मुठ्ठी भर ऐसे लोगों के मंसूबों को हम कामयाब नहीं होने देंगे। विनोद हाण्डा ने लोगों से संयम बरतने और भड़काऊ बयान व भड़काऊ वीडियो व फोटो को एक दूसरे को आदान प्रदान न करने की बात कहते हुए व्यापारियों की सुरक्षा की बात कही। उन्होंने कहा कि दंगे फसाद में अगर सबसे ज़्यादा किसी का नुक़सान होता है तो वह व्यापारी वर्ग ही होता है। ऐसे माहौल को शान्त करने और आपसी भाईचारा क़ायम करने में भी व्यापारी सब से आगे रहता है। बैठक के अन्त में व्यापिरियों ने दंगे में मारे गए लोगों को दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धान्जलि अर्पित की।बैठक में सैय्यद मो० अस्करी, मनोज वर्मा, विनोद हाण्डा, इसरार हुसैन, विवेक सिंह, नजम हसन, राजेश कुमार, मो०वसीम, नितिन चौरसिया, ज़ैनूल हसन, राजू कनौजिया, रामराज, गांगुली वर्मा, मुस्तफा हुसैन, सोनू, रेनू, राम बाबू जयसवाल, नितिन मिश्रा, शेख तौक़ीर अहमद, मो०हामिद आदि उपस्थित थे।

भारत अपने अतीत के वजूद की बहाली के प्रति कदम दर कदम बढ़ने की सोच को अंजाम दे रहा है तो जिन्होंने भारतीयता को तार तार किया वह तबका बेचैनी में अपनी पुश्तैनी हरक़त में आ रहा है और ऐसा करना लाजिमी भी है: वरिष्ठ पत्रकार डॉ मदन यादव।
