भैरु सिंह राजपुरोहित, बीकानेर (राजस्थान ), NIT; 
- हर कोई दावा करने में लगा है, उसके आंदोलन से बंद हुई शराब दुकान जबकी आंदोलन कर रही है जनता
प्रदेश में शराब बंदी को लेकर जन आन्दोलन चला रही समाज सेविका और जस्टिस फॉर छाबड़ा जी संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम अंकुर छाबड़ा (पुत्रवधु शहिद श्री गुरुशरण जी छाबड़ा पूर्व विधायक) ने कहा कि शराब ठेकों के खिलाफ जनता एकजुट होकर शराब ठेकों के खिलाफ खड़ी होने लग गई है। महिलाओं ने तो कई जगह मोर्चा थाम रखा है। लेकिन इन सब के बीच उन संगठनों में शराब की दुकानों के बंद होने का क्रेडिट लेने की होड़ मच गई है, जो यह दावा कर रहे हैं कि उनके आंदोलन के कारण ही शराब की दुकानें बंद हो रही हैं। यही कारण है कि शराब की दुकान के स्थानांतरित होते ही कई संगठन और राजनीतिक दलों के लोग उन दुकानों के बाहर पहुंच कर खुद को क्रेडिट दे रहे हैं और खुद की लाई मालाएं पहन अपने चेलों से तालियां बजवा रहे हैं, जबकि हम शराब बंदी का आन्दोलन करने पर साफ साफ कहते हैं कि यह सब आंदोलन जनता का है और जन आन्दोलन है।
जबकि आन्दोलन कर रहे हैं जागरूक लोग 15-15 दिनों से भूखे प्यासे रहकर इन शराब ठेकों को नहीं खुलने देने का संघर्ष कर रहे थे। इसमें शराबबंदी को लेकर भाषण और बयानबाजी करने वाले इन नेताओं का कोई योगदान नहीं है। यह सब इन आंदोलनों के जरिए अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास कर रहे हैं और छाबड़ा साहब की शहादत पर राजनीती ,पूनम अंकुर छाबड़ा ने कहा कि बहुत दुख होता है इन सब पर जो मेरे पिताजी की शहादत पर राजनीति कर अपनी रोटियां सेंकने में लगे हैं।
प्रदेश में इन दिनों यही हो रहा है, जहां भी कोई आंदोलन की सूचना मिल रही है, शराबबंदी के लिए अपने अपने आंदोलन चला रहे यह संगठन पंहुच रहे हैं और दुकान स्थानांतरित होने पर मालाएं पहनने से भी नहीं चूक रहे हैं। जबकि मालाओं की असली हक़दार जनता है जिनके सग्रश की जीत हुई है। आप सब गौर से देखोगे तो पता चल जायेगा। बैनर किसी और का और यह नौटंकी करने पहुंच जाते हैं, जबकी आम जन परेशान हैं और यह लोग अपनी राजनीती चमकाने में मशगूल।
संपूर्ण शराब बंदी आन्दोलन जस्टिस फॉर छाबड़ा जी और पूनम अंकुर छाबड़ा पुरे प्रदेश के शराब बंदी के लिए जागरूक हुए आम जन का आभार प्रकट करती हूं और हम सदैव संपूर्ण शराब बंदी के लिए गैर राजनीतिक रूप से आंदोलनरत हैं और रहेंगे।
