साबिर खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए गए बदलावों के विरोध में 2 अप्रैल 2018 को किए गए भारत बंद की धूल फांक रही बंद फाइल गुरुग्राम पुलिस ने एक साल दस महीने बाद खोल दी है। सरकारी आदेशों पर इस कार्यवाही से अखिल भारतीय भीम सेना के सितारे गर्दिश में आने की संभावना है। भीम सेना के दोनों बड़े पदाधिकारियों पर पुलिस के कसते हुए शिकंजे को देखते हुए गुरुग्राम के उन अन्य लोगों में भी हड़कंप मच गया है जो भारत बंद में शामिल थे। भीम सेना चीफ़ नवाब सतपाल तंवर और भीम सेना के राष्ट्रीय प्रभारी अनिल तंवर हाईवे जाम करने के मुख्य आरोपी हैं। गुरुग्राम जिला सेशन कोर्ट ने नवाब सतपाल तंवर और अनिल तंवर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। पुलिस द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट में पाया गया कि आरोपितों के खिलाफ हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों में भी केस दर्ज हैं। गुरुग्राम पुलिस का कहना है कि भीम सेना चीफ़ नवाब सतपाल तंवर अन्य राज्यों में मोस्ट वांटेड है जिसके ऊपर देशद्रोह का भी आरोप है जो आए दिन राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन करते रहते हैं जिन्होंने दिल्ली पुलिस की नाक में दम किए हुए हैं। अनिल तंवर और नवाब सतपाल तंवर पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। गुरुग्राम पुलिस दोनों को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। जिससे भारत बंद में शामिल अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी भी कभी भी की जा सकती है। खबर सामने आते ही भारत बंद में शामिल अन्य आरोपी अंडरग्राउंड होने के लिए जगह तलाशते फिर रहे हैं परन्तु भीम सेना के दोनों पदाधिकारी अनिल तंवर और नवाब सतपाल तंवर अब भी केंद्र सरकार और राज्य सरकार को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। भारत बंद मामले में पुलिस ने नायब तहसीलदार की शिकायत पर हाईवे एक्ट लगाया है जोकि गैरजमानती है।

वीरवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ में अनिल तंवर की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए जज सुदीप आहुवालिया ने बेहद गंभीर टिप्पणी की है और आरोपी से भविष्य में कभी प्रदर्शन ना करने का हलफनामा मांगा है जिसे देने से आरोपियों ने साफ इंकार कर दिया है। तीन घंटे चली लंबी बहस के बाद हाईकोर्ट ने निर्णय 25 फरवरी तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। आने वाली 25 फरवरी को भी हाईकोर्ट का माहौल गरमाने के आसार हैं। हलफनामा मांगे जाने की हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से न्यायिक क्षेत्र में नई बहस छिड़ गई है। सवाल है कि हाईकोर्ट किसी भी नागरिक के प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार को कैसे समाप्त कर सकता है। नवाब सतपाल तंवर का कहना है कि हाईकोर्ट के जज सुदीप आहुवालिया ने प्रदर्शन ना करने का हलफनामा मांग कर संवैधानिक नियमों का अपमान किया है। बेशक वे जमानत दें या ना दें लेकिन हम अपने मौलिक अधिकार को हाईकोर्ट के किसी मनुवादी जज के पास गिरवी नहीं रखेंगे। संविधान को बचाने की लड़ाई पहले से भी अधिक ताकत से लड़ेंगे चाहे जेल हो या फांसी।
गौरतलब है कि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, झारखंड आदि राज्यों में अखिल भारतीय भीम सेना का खासा प्रभाव है। पूरे देश में नवाब सतपाल तंवर के भड़काऊ भाषण वायरल होते रहते हैं। इससे केंद्र सरकार भी काफी परेशान है। भीम सेना ने नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली में मार्च भी निकाला और आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ भी भीम सेना लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। लेकिन ना तो गुरुग्राम पुलिस कुछ कर पा रही है और ना ही दिल्ली पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की हिम्मत जुटा पा रही है। जबकि भीम सेना के दोनों पदाधिकारी खुलेआम आंदोलन करते घूम रहे हैं और सरकारों कि धज्जियां उड़ा रहे हैं। यदि अनिल तंवर और नवाब सतपाल तंवर की गिरफ्तारी होती है तो ऐसे में दलित समाज के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। मिली जानकारी के अनुसार भीम सेना चीफ़ नवाब सतपाल तंवर ने खुलेआम चेतावनी दी है कि यदि भाजपा सरकार ने पुलिस को मोहरा बनाकर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की तो वे बड़ा बवाल खड़ा कर देंगे। तंवर के बयानों से लगता है जैसे भीम सेना सरदार के दिल में कानून का कोई खौफ ही नहीं है। देखना दिलचस्प होगा कि हाईवे एक्ट मामले में भीम सेना के पदाधिकारियों को जमानत मिलती है या जेल की हवा खानी पड़ेगी।

इन दोनो पद अधिकारीओ को जमान मिलनी चाहिए माना की कुछ गलती हु होगी पर ये समाज हित की लडाई लड रहे है इस मे इनकी निजी कोई सोवारथ नही है अदि सरकार कोई निर्णय ले रही है अदि उससे जनमानस भावना या अधिकार का हनन होता है तो सवभाभिक है की सरव समाज के हक अधिकार केलिए संवैधानिक तैर पर लडाई लड सक्ता है येसे परसतिती मे पुलिस प्रसान और न्यापालिका को जनहित के लिए समाजिक आनदोलकारीयो को शान्ति और सहयोग प्रदान करना चाहिए
ये मेरा अपना विचार है
जय संविधान जय लोकतन्त्र
जैेसे पहले दुछ लोग बन्दर को नचा कर खाना खाते कुछ भगवान का भय दिखा कर खाना खाते थे उसी तरह ये लोग ये झुठ फैला कर खाना खा रहे है कि संविधान बाबा भीम ने लिखा था ओर हम इसकी सुरक्षा कर रहे । इनको ये पता नही कि ये सरकार का अपना दस्तावेज है । इसको किसी ऐरे गैरे से सुरक्षा कि जरूत नही है ।इसमे बदलाव होना समय की पुकार होती हैं । संविधान की मूल प्रति पर एक महीने मे होने वाले खर्च को ये अपनी सारी सम्पति को बेच कर पूरा नही कर सकते ये मुफतखोर कमाके खाना तो हे नही।
भारतीय नागरिक होने के नाते व प्रजातंत्र में हर नागरिक को अपने खिलाफ हुवे जोर जुर्म हेतू शांति पूर्ण आंदोलन करने का मौलिक अधिकार जब संविधान में दर्शाया गया है तो कोई भी देश की अदालत इसे रोकने हेतू आजीवन पाबंदी किसी नागरिक पर क्यों लगाए? ऐसा करना तो नागरिकों को फिर से गुलाम बनाना व उन पर अत्याचार ढहाना है ?