Edited by Sandeep Shukla; भोपाल, NIT; ज्योतिरादित्य सिंधिया मप्र में होंगे कांग्रेस का चेहरा,  टिकिट बंटवारे की मिली खुली छूट, दिग्विजय सिंह गये बैकफुट पर | New India Times​मध्य प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियां अपनी अपनी रणनीति बनाने में लगी हैं। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों से सीख लेते हुए कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति तय कर ली है। ज्योतिरादित्य सिंधिया मप्र में अब कांग्रेस का चेहरा होंगे। उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया है। साथ ही फ्री हैंड देते हुए टिकट बांटने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री और बंटाधर की छवि बना चुके दिग्विजय सिंह को चुनाव होने तक प्रदेश की राजनीति में हस्तक्षेप करने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। सोमवार को दिल्ली में राहुल गांधी के बंगले पर आयोजित की गई कांग्रेस हाईपाॅवर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।ज्योतिरादित्य सिंधिया मप्र में होंगे कांग्रेस का चेहरा,  टिकिट बंटवारे की मिली खुली छूट, दिग्विजय सिंह गये बैकफुट पर | New India Times​उत्तर प्रदेश में मिली करारी हार की समीक्षा के लिए आयोजित इस बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल बोरा, सुरेश पचैरी, अशोक गहलोत, शीला दीक्षित, अंबिका सोनी, मनीष तिवारी,कमलनाथ, कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक मेें यह निष्कर्ष निकला कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का कोई चेहरा न होने और सपा से गठबंधन हार का कारण। जबकि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ने पर पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला। इसी को आधार बनाते हुए मप्र में सत्ता हासिल करने और गुटबाजी को समाप्त करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने का निर्णय लिया गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिंधिया के नाम का प्रस्ताव रखा और मोतीलाल बोरा ने समर्थन किया।ज्योतिरादित्य सिंधिया मप्र में होंगे कांग्रेस का चेहरा,  टिकिट बंटवारे की मिली खुली छूट, दिग्विजय सिंह गये बैकफुट पर | New India Times
सिंधिया के नाम को हरी झंडी मिलने के साथ ही राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब मध्यप्रदेश में चुनाव होने तक दिग्विजय सिंह का कोई दखल नहीं रहेगा। उन्हें प्रदेश की राजनीति से दूर रखा जाएगा। यदि उनका कोई समर्थक है तो उसे टिकट देने की अनुशंसा कर सकेंगे लेकिन टिकट देना या न देना उनके हाथ में नहीं होगा।
विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए किसे चुनना है और किसे नहीं यह सब सिंधिया पर निर्भर करेगा, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान ने सिंधिया को फ्री हैंड जो दिया है। लेकिन कमलनाथ सिंधिया का मार्गदर्शन करते रहेंगे। ताकि दिग्विजय सिंह की तिकड़मों से बचा जा सकेगा। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले चुनाव में दिग्विजय सिंह, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह सहित अन्य नेताओं की मिली भगत के कारण सिंधिया को आगे न करपाना बड़ी भूल थी। जिसका परिणाम सबके सामने हैं लेकिन अब देरी करना और भी खतरनाक हो सकता है।

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया एक मात्र ऐसे नेता हैं जो निर्विवाद होने के साथ ही हर वर्ग के चहेते हैं। युवाओं की पहली पसंद बने हुए हैं। लंबे अर्से से प्रदेश वासी सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट करने की मांग कर रहे थे। अब जाकर उनकी यह मांग पूरी हो पाई है।

सिंधिया पिछले दो महीने से सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। फेसबुक पर क्यू एंड आस्क सिंधिया के तहत उन्होंने जनवरी और फरवरी में अपने प्रशंसकों और समर्थकों से लाइव चैट की थी। इस दौरान उन्होंने लोगों के सवालों का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश की कमान संभालने और पार्टी का चेहरा घोषित करने के अपने इरादों को जाहिर किया था।

सिंधिया के फेसबुक पर अपने इरादे जाहिर करने और मध्य प्रदेश में सीएम प्रत्याशी घोषित करने के लिए सोनिया से बात करने के लिए अपने प्रशंसको से कहने पर उनके समर्थकों ने सोनिया गांधी को 2 लाख पोस्ट कार्ड भेजे थे। जिसमें सभी ने एक ही मांग की थी कि जल्द से जल्द सिंधिया को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया जाए।

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