नागरिकता संशोधन बिल (CAB) 2019 के विरोध में चल रहे आंदोलनों ने पकड़ा जोर, पूरे देश में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी हो रहा है प्रदर्शन | New India Times

नरेंद्र इंगले, जलगांव/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

नागरिकता संशोधन बिल (CAB) 2019 के विरोध में चल रहे आंदोलनों ने पकड़ा जोर, पूरे देश में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी हो रहा है प्रदर्शन | New India Times

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) के विरोध में AMU, जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के बाद देशभर की लगभग 2500 यूनिवर्सिटीज के छात्रों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को अब ग्रामीण इलाकों से भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। इसी सप्ताह जामनेर में अल्पसंख्यक समुदाय ने तहसील कार्यालय पर विशाल पैदल मार्च का आयोजन किया। मुक्ताईनगर में देश बचाओ संविधान बचाओ के बैनर तले मुस्लिम मंच, जमात ए उलेमा ए हिन्द बहुजन क्रांति मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा आदि संगठनों ने CAB के खिलाफ मोर्चा निकाला। राजु खरे, मोहम्मद आमिर समेत अन्य गणमान्यों ने आंदोलन की अगुवाई की। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद कानून की शक्ल ले चुके इस बिल को लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में कड़ा विरोध साफ तौर पर देखा जा रहा है। कई जगहों से हिंसा की खबरें भी आ रही हैं। जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ पुलिस की बर्बरता ने मानवता की सभी सीमाओं को पार कर दिया है। पुलिसिया बल प्रयोग मे लड़कियों तक को बख्शा नहीं गया। बहुमत के अहंकार में चूर सरकार के सनक वाले तानाशाही फैसलों के खिलाफ इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर रहे छात्रों को अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए आजाद भारत के लोकतंत्र में फिर से किसी स्वतंत्रता संग्राम की तरह ही लड़ाई लड़ना पड़ रही है। CAB के विरोध में पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली और केरल तक के हर बुद्धिजीवी भारतीय नागरिक को सड़क पर उतरना पड़ा जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने विवादित बिल में संशोधन की बात कही। जब कोई भी आंदोलन शिक्षा क्षेत्र से होकर छात्रों के जरिये जनता के बीच पहुंचता है तब अच्छे अच्छों की हेकड़ी ठिकाने आ जाती है। CAB का यह आंदोलन अब भारत के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक तेजी से पहुंच रहा है। भले ही उन्नीस बीस मीडिया संस्थान इसे कवरेज देने से बचते हुए उल्टा दोहन करने मे लगी हुई हैं लेकिन इसका कोई बुरा असर इस लड़ाई पर नहीं दिखाई पड़ रहा है। महाराष्ट्र के नागपुर में विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका है। भाजपा ने किसान मजदूर जैसे अहम विषयों को दरकिनार करते हुए सावरकर के कथित अपमान वाले मुद्दे को हवा देकर जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को सुनिश्चित कर लिया है। CAB को लेकर मुंबई से लेकर नागपुर, कोल्हापुर तक हर वह व्यक्ति बतौर भारतीय सड़क पर डटा है जो इस बिल को समझता है। कानूनी विचारकों की राय के मुताबिक़ यह बताया जा रहा है कि CAB शीर्ष अदालत में संवैधानिक मानदंडों पर धराशाई हो जाएगा। बहरहाल CAB के विरोध में जनता द्वारा सड़कों पर लड़ी जा रही इस लड़ाई में लोगों का एक ही धर्म है और वह है भारतीय।

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