अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

परिवहन विभाग के उड़नदस्ते द्वारा स्कूल बसों की जांच सोमवार से की जाएगी। इस दौरान अफसर देखेंगे कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का बसों में पालन हो रहा है या नहीं। परिवहन विभाग के अफसरों ने बताया कि स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर लगे होने, अग्निशमन यंत्र, डबल डोर, इमरजेंसी गेट, सीट के बीच में पर्याप्त स्पेस, परमिट और ड्राइवरों के लाइसेंस की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि बसों में क्षमता से ज्यादा बच्चें तो नहीं बैठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि शहर सहित ज़िले में स्कूल और कॉलेज बसों, ऑटो रिक्शा और वैन का संचालन किया जा रहा है।
उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार शालाओं के शुरू होने के पूर्व प्रतिवर्ष परिवहन विभाग द्वारा बसों की जांच की जाती है जिसके लिए जिले में विभिन्न शालाओं की बसों का जांच अभियान उप प्रादेशिक परिवहन विभाग द्वारा सोमवार 25 नवंबर से शुरू किया जाएगा जो 10 दिसंबर के पहले पूरा किया जाएगा। इस तरह की जानकारी उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी ने दी है।
उल्लेखनीय है कि शालाओं में विद्यार्थियों के परिवहन के उपयोग में लाई जा रही बसों की नियमित जांच आवश्यक है। इस पर उच्च न्यायालय द्वारा 7 अप्रैल 2016 को दिए गए आदेशानुसार शालाओं के शुरू होने के पहले सभी बसों की जांच करवाना अनिवार्य है। दिवाली के बाद सभी शालाएं शुरू हो गयी हैं। स्कूल बस सुरक्षा नियमावली 2011 के अनुसार सुरक्षा संबंधित सभी नियमों को कड़ाई से पालन किया जाना है जिसमें सभी बसों की जांच की जाती है। मुख्य रूप से इमरजेंसी गेट तथा बस का डिसप्ले, दरवाजे की व्यवस्था उचित होने तथा अन्य सुविधाएं जिससे विद्यार्थियों को परेशानी न हो जिसके लिए जिले में विभिन्न निजी शालाओं की बसें,
वैन और ऑटो रिक्शा धुलिया परिवहन कार्यालय में पंजीकृत है अथवा नहीं जिनकी जांच शुरू की जाएंगी। परिवहन विभाग ने स्कूल प्रशासन स्कूल बस ऑटो रिक्शा चालकों से परिवहन विभाग को सहयोग करने का आह्वान किया है।
ज़िले के सभी स्कूलों के वाहनों की जल्द ही जांच की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार बसों तथा ऑटो रिक्शा की जांच की जाएगी। कोर्ट के निर्देश का जो भी पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ इस बार भारी जुर्माना लगाने की तैयारी है। उनका परमिट भी रद्द किया जाएगा क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसलिए सख्ती के साथ जांच किया जाएगा। ताकि भविष्य में किसी भी तरह का हादसा न हो, जांच से पहले स्कूल के प्राचार्यों एवं शिक्षा विभाग को सुरक्षा संबंधित दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। उसके बाद स्कूल बसों और ऑटो रिक्शा आदि वाहनों की जांच कड़ाई से की जाएंगी: जयदीप पवार उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, धुले, महाराष्ट्र।
