माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के विद्यार्थीयों ने जारी नर्मदा आंदोलन के धरना सत्याग्रह को दिया समर्थन | New India Times

अंकित तिवारी, बड़वानी (मप्र), NIT:

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के विद्यार्थीयों ने जारी नर्मदा आंदोलन के धरना सत्याग्रह को दिया समर्थन | New India Times

नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार आज नर्मदा बचाओ आंदोलन के नर्मदा भवन के सामने के धरना सत्याग्रह के स्थल पर माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के चार युवा नितेश, रोहित, विशाल, अंशुमान तथा नर्मदा घाटी की ओर से दो प्रतिनिधि जगदीश पटेल और रामकुंवर बाई ग्राम पिपलूद एक दिवसीय अनशन पर बैठे। यह युवाओं की वेदना संवेदना के साथ के जुड़ाव की बात है और इन युवाओं ने कार्यकर्ता बनकर पिछले पांच दिन जो योगदान इस सत्याग्रह में दिया उसके लिए वे अभिनन्दन के पात्र हैं। उसी विश्वविद्यालय के क़रीबन 50 युवा साथी माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, भोपाल से पैदल मार्च करते हुए धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने अपना जोरदार समर्थन घोषित किया। आज नर्मदा युवा सेना के कार्यकर्ता भी इसी प्रकार से समर्थन देने के लिए पधार रहे हैं। इन युवाओं का स्वागत करते हुए आंदोलन की ओर से मेधा पाटकर जी ने कहा कि अपना कैरियर, अपना स्वार्थ छोड़कर गरीबों के, किसान-मज़दूरों के सामाजिक-आर्थिक सवाल जिसमें विस्थापन भी है, बेरोज़गारी है, इनकी ओर ध्यान देना और उनके जीने के अधिकार के संघर्ष में युवाओं के शामिल होना बड़ी बात है। इन युवाओं ने निश्चित ही एक आदर्श पैदा कर दिया है। आज तक नर्मदा बचाओ आंदोलन जब भी भोपाल आया या अन्य जगह डेरा डाला वहां सभी समर्थक साथी आते ही रहे हैं पर विशेषतः युवाओं का यह सहभाग अभिनंदनीय है।

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के विद्यार्थीयों ने जारी नर्मदा आंदोलन के धरना सत्याग्रह को दिया समर्थन | New India Times

आज मुंबई के पासपोर्ट ऑफिस ने मेधा पाटकर जी को लिखे हुए चेतावनी भरे पत्र पर जिसमें कि उनके खिलाफ विविध पुलिस थानों में दाखिल शिकायतों का और आपराधिक प्रकरणों का जिक्र है लेकिन विस्तार से जानकारी नहीं है ऐसे पत्र का जवाब दे पाये है फिर भी उसके बारे में एक अहम खबर दिल्ली की किसी एजेंसी के द्वारा उठायी जाकर देश में अलग-अलग जगह पर फैली हुई है सच्चाई यह है कि उस पत्र का जवाब देते हुए मेधा पाटकर जी ने यह कहा है कि इन सभी केसों में 30 मार्च 2017 के रोज जबकि पासपोर्ट के लिए अर्जी डाली गयी, वह बरी हो गई थी और एक ही केस जो बड़वानी के जिला कोर्ट में जारी है उसकी FIR उस तारीख के यानी 30 मार्च 2017 के बाद अगस्त 2017 में दाखिल हुआ था, इसीलिए पासपोर्ट के लिए अर्जी करते समय इन बातों का कही जिक्र भी नहीं था। आज यह स्थिति हो रही है कि हर कार्यकर्ता को किसी न किसी चंगुल में पकड़े और फ़साये।

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के विद्यार्थीयों ने जारी नर्मदा आंदोलन के धरना सत्याग्रह को दिया समर्थन | New India Times

यह बात साफ है कि अभी जब की फिर से आंदोलन चोटी पर है और सरदार सरोवर की पोलखोल हो चुकी है तब नर्मदा बचाओ आंदोलन को बदनाम करने के लिए और व्यक्तिगत बदनामी के लिए कई सारे लोग जिन्होंने इस बाँध का सुनहरा वर्णन करते हुए आगे बढ़ाया था जो कि अब सच नहीं हुआ है वे सब बहुत खुश हैं कि कोई न कोई मुद्दा उन्हें हाथ में मिला है जिससे वे आंदोलन को ही सवाल कर सकें लेकिन अपने जवाब से मेधा पाटकर जी ने यह जाहिर किया ही है, साथ ही पासपोर्ट ऑफिस तक बात भी पहुंचाई है कि उन्होंने जो आदेशों कि या अन्य कागजातों कि प्रति मांगी है वह देने की तैयारी है जिसके लिए कुछ समय तो कोर्ट से कागजात निकलने में लगने वाला ही है। देश में कई सारे सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनकी कोई न कोई भूल जैसी कृति बताते हुए लक्ष्य बनाना और अगर हो सके तो जेल में डालना, यही बात मेधा जी के बारे में हो रही है, इसलिए इसे एक प्रकार की साजिशी कार्यवाही कह सकते है जिसमें हमें बदनाम करने कि चाहत किसी से रखी होगी और पूर्व में चल रही बदनामी कि केसों के आगे चल कर जो की मेधा जी के खिलाफ है, उन केसों कि पोलखोल करना जरूरी है और हम यह कर के रहेंगे। किस एजेंसी ने दिल्ली से यह वृत्त प्रस्तुत किया यह तक खबर में बताया नहीं गया है इस प्रकार की गोपनीय कार्यवाही से सवाल आते है कि आखिर यह कहना क्या चाहते है, और करना क्या चाहते हैं। हम अपने विवेक के आधार पर बढ़ते रहे है यही स्पष्ट है।

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