वी.क. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

मोहम्मदी नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में नौनिहालों को घटिया भोजन परोसा जा रहा है। विद्यालयों में भोजन बनाकर सप्लाई करने की जिम्मेदारी एक संस्था के पास है जो जमकर मानकों की धज्जियां उड़ा कर बच्चों को घटिया भोजन सप्लाई कर रही है। भोजन देख तमाम स्कूलों के बच्चे खाना खाने से ही इन्कार कर देते हैं। भोजन में मानकों का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। जो साप्ताहिक चार्ट बना हुआ है उसके अनुसार भोजन नहीं बनाया जाता है। स्कूलों के प्रधानाध्यापक भी घटिया भोजन की शिकायत करते हुए डरते हैं कि पूरे जिले का ठेका एनजीओ के पास है जो ऊपर के अधिकारियों ने दिया है, शिकायत करने पर कहीं उनके विरुद्ध कार्रवाई ना हो जाए। इस सबके बीच स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चे घटिया मध्यान भोजन खाने को मजबूर हैं। बच्चे प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करें तथा वहीं उनको मध्यान्ह भोजन मिले यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पूरे भारत में लागू है। वहीं नगर क्षेत्र बाबोरी में प्राथमिक विद्यालय में 4 बच्चों ने खाना नहीं खाया। जब उनसे पूछा गया तो बताया कि दो दिन पहले मुझे खाना जो दिया गया जिसमें मुझे दाल में शूड़ी दिखाई पड़ी और मैंने इसकी शिकायत मैडम से की थी। इसलिए मैं मिड डे मील द्वारा जो भोजन आ रहा है उसको मैं नहीं खा रहा हूं, मैं घर से खाना खा कर आता हूं। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में जहां विद्यालयों में ही भोजन बनाया जाता है वहीं नगर क्षेत्र के लिए एनजीओ के माध्यम से बना बनाया भोजन सप्लाई किया जाता है।

मोहम्मदी नगर के लगभग 12 विद्यालयों में ग्रामीण विकास सेवा संस्थान के माध्यम से भोजन सप्लाई किया जाता है लेकिन नगर क्षेत्र के विद्यालयों में सप्लाई किए जाने वाला भोजन गुणवत्ता के दृष्टिकोण से निम्न दर्जे का होता है। बच्चों को जो तहरी सप्लाई की जाती है उसमें चावल और आलू के अलावा कुछ नहीं होता हां कुछ पत्ती धनिए की जरूर दिखाई पड़ती हैं। जबकि तहरी के मानक के अनुसार उसमें सोयाबीन की बड़ी मौसमी सब्जियों घी सहित तमाम सामग्री होनी चाहिए। जब दाल रोटी का दिन आता है तब दाल बहुत पतली होती है। यह बच्चों ने स्वयं स्वीकार किया। सब्जी रोटी के दिन रोटियां कच्ची सप्लाई की जाती हैं और सब्जी में पानी की मात्रा अधिक होती है।जब हमारी टीम ने प्राथमिक विद्यालय सरैया द्वतीय प्राथमिक विद्यालय सरैया प्रथम प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर छावनी में मध्यान भोजन का हाल देखा तो वहां बच्चों ने बताया कि आज तक इस सत्र में उनको सिर्फ एक बार दूध मिला है, फल कच्चे मिलते हैं, तहरी ऐसी की बच्चे खाने से इंकार कर देते हैं और दाल पतली। जब इन स्कूलों के अध्यापकों से पूछा गया कि आप लोग शिकायत क्यों नहीं करते तो अध्यापक जो भोजन की बुराई करते हुए नहीं थक रहे थे वह विभाग को लिखने से साफ मुकर गए। उन्होंने कहा अगर हम विभाग को लिखेंगे तो हमारा ही नुकसान होगा क्योंकि ठेका ऊपर से दिया गया है और ठेकेदार का कहना है कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जब इस संबंध में ठेकेदार से बात की गई कि बच्चों को घटिया खाना दिया जा रहा है और दूध एक बार ही सप्लाई किया गया तो उसका कहना था कि सभी स्कूलों से भोजन के संबंध में हमारे पास लिखित बिल हैं कि हम समय पर और सही भोजन की सप्लाई करते हैं। लेकिन मौके पर कुछ और ही दिखता है। तहसील क्षेत्र के तमाम अधिकारी भी इस विषय में खामोश हैं। आज तक उन्होंने आवश्यक नहीं समझा कि बच्चों को किस गुणवत्ता का खाना दिया जा रहा है और जहां खाना बन रहा है वहां की स्थिति क्या है उसका कभी जाकर मौका मुआयना करें। कुल मिलाकर इतना ही लगता है कि हरे नोटों की चमक के आगे सब कुछ सही है। एनजीओ संचालक की पहुंच ऊपर तक है उसका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। प्रधानाध्यापक शिकायत इसलिए नहीं करेंगे कि उन्हें अपना नुकसान होने का डर है। रह गए बच्चे जो घटिया खाना खाने को मजबूर हैं। यह व्यवस्था कब तक चलेगी और इसमें सुधार होगा या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है।
अभी तक मामला संज्ञान में नहीं था। नगर क्षेत्र में चल रहे मिड डे मील के माध्यम से संस्था के द्वारा जो लापरवाही खाने में बरती गई बेहद गलत है। जल्द ही औचक निरीक्षण कर संबंधित संस्था पर बड़ी से बड़ी कार्रवाई की जाएगी: एसडीएम स्वाति शुक्ला।
