गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकरनगर (यूपी), NIT:
उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिला में एक गांव ऐसा भी है जहां खुलेआम सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, अगर इसे चीरहरण कहेंगे तो इसमें कोई दो राय नहीं है। इस गांव में विकास के पापा तो पहुंच गए मगर विकास नहीं पहुंचा। यहां कोई बुनियादी सुविधा नहीं है, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गांव में लड़कों और लड़कियों की शादी तक नहीं हो पा रही है।
कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के गांव चांदपुर जलालपुर जहाँ हजारों की आबादी है, इस गांव में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। सड़क, नाली, शौचालय, आवास योजना, विद्युतीकरण, जैसी बुनियादी सुविधाएं इस गांव में नदारद हैं। घरों के सामने गड्ढों और रास्ते में फैला पानी गांव में विकास की हकीकत बताने के लिए काफी है। बने हुए सैकड़ों शौचालय साल भर भी नहीं चले, यहां लाखों रुपए का भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। मीडिया टीम जब हकीकत जानने के लिए उस गांव में गई तो यह आरोप 100% सत्य पाया गया। इस गांव के लोगों का दर्द आंखों से छलक रहा है। 
बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे सारे गांव के लोगों को अब तक अच्छी सड़क भी नसीब नहीं हुई है। विकास के बयार बहने की ढोल पीट रही सरकार को झुठला रहा है कटेहरी विधानसभा क्षेत्र का यह गांव, इस गांव की आबादी लगभग हजारों से अधिक है। मेहनत मजदूरी व खेती के बदौलत अपनी जीविका चलाने वाले ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से विकास के झूठे दावे सुनकर थक चुके हैं। यह गांव आज तक कई बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। इक्कीसवीं सदी की अहम जरूरत सड़क के अभाव में ग्रामीण कैसे आवागमन करते है, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधि तो दूर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भी इस गांव की दुर्दशा दूर नहीं कर सकी है। डिजिटल इंडिया विद्युतीकरण तक नहीं हुआ है। शौचालय जो बने उस में भी जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक मकान सरकार की मंशा थी एक आदर्श गांव बनाने की, लेकिन प्रदेश सरकार की इस सपने को सरकारी तंत्र में बैठे अधिकारियों ने तवज्जो न देने से उनकी यह मंशा धरी की धरी रह गई है।
