अतिश दीपंकर ,पटना ( बिहार ), NIT;
प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेषों क अवलोकन के बाद राष्टपति सभा स्थल पहुंचे थे। जहां लोगों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महिलाओं एवं पुरुषों की बडी तादात मौजूद थी।
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर राज्य के आला अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी सहित अन्य ने सुरक्षा पर कड़ी नजर रखे हुए थे। डी .एम ,एस एस पी एवं अन्य अधिकारी पल- पल सुरक्षा का जायजा ले रहे थे । पुलिस, महिला पुलिस जगह-जगह पर तैनात थी ।आम से खास लोगों पर खास नजर था ।पुलिस पूरी निरीक्षण के बाद ही सभा स्थल तक लोगों को जाने दे रही थी। यहां तक कि मीडिया को भी जांच के बाद ही कवरेज करने दिया जा रहा था ।आम से लेकर खास लोगों पर कड़ी नजर थी। सुरक्षा ऐसा कि परिंदा भी पर न मार सके । 3 लेजर सुरक्षा की व्यवस्था थी । वहीं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आगमन को लेकर पंडाल एवं मंच काफी सुंदर , सुरक्षित एवं मनमोहक बनाया गया था। महिला – पुरुष सभी राष्ट्रपति की बातों को ध्यान से सुन रहें थे। जैसे लग रहा था कि, कभी यहां शिक्षा का केंद्र रहा होगा ।लोग वैसे ही राष्ट्रपति की बातों को सुन रहे थे जैसे गुरु की बातों को शिष्य सुन रहा हो। बहुत ही अच्छा सुहावना माहौल लग रहा था। सच में लग रहा था कि, कभी यहां शिक्षा का केंद्र रहा होगा। शायद उसी मिट्टी का असर था कि यह नजारा ऐसा देखने को मिला। विक्रमशिला की स्थापत्य एवं मूर्तिकला पुस्तक में पुस्तक के लेखक डॉ प्रो विनय प्रसाद गुप्त ने लिखा है कि, यहां का माहौल बहुत ही सभ्य और शैक्षणिक था ।वास्तव में ऐसा ही वातावरण दिख भी रहा था। जैसे सब लोग यहां के बहुत ही सभ्य और सुशील हों।
लोगों ने कड़ी धूप में भी बहुत धैर्यता का परिचय दिया। राष्ट्रपति के आने पर राष्ट्रपति का सभी लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया एवं पुन: उनके आने की अपेक्षा की।
राष्ट्पति कहलगांव एनटीपीसी के हेलीपैड पर उतरे वहां से सीधे एनटीपीसी के गेस्ट हाउस मानसरोवर में रात्रि विश्राम के बाद दूसरे दिन सुबह विक्रमशिला के अवलोकन के बाद सभा को संबोधित किए। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के आने पर राज्यपाल ,मंत्री, विधायक एवं एनटीपीसी के जी एम ने बुकें देकर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का स्वागत एवं सम्मान किया।
