दस्तावेज के नाम छपारा पंचायत द्वारा आवेदक को प्रताड़ित व गुमराह करने का आरोप, पीडित ने कलेक्टर से लगाई गुहार | New India Times

पीयूष मिश्रा, सिवनी ( मप्र ), NIT; ​​दस्तावेज के नाम छपारा पंचायत द्वारा आवेदक को प्रताड़ित व गुमराह करने का आरोप, पीडित ने कलेक्टर से लगाई गुहार | New India Timesसिवनी जिला के छपारा ग्राम पंचायत द्वारा 2010 में शॉपिंग कांप्लेक्स  के संबंध में निविदा प्रकाशित की गई थी, जिसमें सुरेश विश्वकर्मा द्वारा निविदा की गई थी,  जिसमें शॉपिंग कांप्लेक्स बस स्टैंड छपारा में कमरा नंबर 27 दिया गया था। जो निर्माण में चौकोर ना होकर तिरछा बनाया गया जोकि नाप और आकार की दृष्टि से न्यायसंगत नहीं था। अतः आवेदक ने तहसीलदार छपारा से गुहार लगाई परिणाम स्वरुप आवेदक पंचायत द्वारा रिक्त पड़ा कमरा नंबर 33 का आवंटन पत्र आवेदक को प्राप्त हुआ तथा अनुबंध किया गया कि समय-समय पर आवेदक से कमरा का किराया लिया जाए। उसके बाद भी पंचायत द्वारा पत्र क्रमांक 169 पत्र क्रमांक 358 पत्र क्रमांक 367 पत्र क्रमांक 351 पत्र क्रमांक 333 में बस स्टैंड कॉन्प्लेक्स कमरा नंबर 33 के विषय में संपूर्ण दस्तावेज मांगे गए। आवेदक द्वारा पंचायत को दस्तावेज दिया गया।​दस्तावेज के नाम छपारा पंचायत द्वारा आवेदक को प्रताड़ित व गुमराह करने का आरोप, पीडित ने कलेक्टर से लगाई गुहार | New India Times जब आवेदक को पंचायत में गड़बड़ी समझ में आई तो आवेदक द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दिनांक 4.3.2017 को 33 नंबर कमरे की संपूर्ण जानकारी ली गई जिसमें आवंटन पत्र निविदा के अनुसार हुआ था इस हेतु मध्यप्रदेश पंचायत नियम 1994 के प्रावधानों के अनुरूप विधिवत अनुबंध पत्र भारतीय गैर न्यायिक स्टांप पेपर निष्पादित हुआ था और ग्राम पंचायत छपारा के कार्यालय ज्ञापन क्रमांक 715 कॉन्प्लेक्स 10 छपारा दिनांक 4 .10 .2010 के परिणाम स्वरुप तहसीलदार महोदय छपारा के द्वारा जारी पत्र क्रमांक 16 28 तह 10 छपारा दिनांक 8.1 0.2010 के अनुसार ग्राम पंचायत छपारा को निर्देशित कर दुकान क्रमांक 33 का आवंटन प्रार्थी को किए जाने की अनुमति प्रदान की गई इस प्रकार मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज्य अधिनियम 1993 की धारा 65(1) के अनुसार राज्य सरकार के प्राधिकृत अधिकारी की हैसियत से तहसीलदार छपारा की अनुमति से दुकान क्रमांक 33 का आवंटन प्रार्थी सुरेश विश्वकर्मा को किया गया अतः अधिनियम की धारा 86 और विशेष रुप से उप धारा 2 के अनुसार ग्राम पंचायत छपारा उप धारण(1) के अधीन प्राधिकृत अधिकारी के द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन करने के लिए बाध्य है। ​
ग्राम पंचायत छपारा की प्रस्तावना दिनांक 8.10.2010 के तदुपरांत अनुमोदन देना 11.10.2010 के अनुसार ही दुकान का आवंटन प्रार्थी को हुआ है यह विशेष रूप से अवलोकन ही है कि उक्त प्रस्तावना एवं अनुमोदन मैं दुकान क्रमांक 27 का उल्लेख नहीं है इस प्रकार कार्यालय ग्राम पंचायत छपारा द्वारा जारी आदेश क्रमांक 721 शॉपिंग कॉन्पलेक्स 2010 छपारा दिनांक 13.10.2010 के अनुसार सुरेश विश्वकर्मा को दुकान क्रमांक 33 का आवंटन हुआ है एवं पंचायत द्वारा समय-समय पर आवेदक से कमरा का किराया नवंबर 2016 तक लिया गया इसके बाद भी पंचायत की लापरवाही एवं चाणक्य नीति के द्वारा कमरा नंबर 33 का इंद्राज नहीं किया गया तथा आवेदक को दस्तावेज के नाम पर प्रताड़ित एवं गुमराह किया गया जिस से प्रताड़ित होकर जिला कलेक्टर में 33 नंबर कमरे का इंद्राज करने की गुहार लगाई है।

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