संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमानगंज में पदस्थ डॉक्टर एम.के. गुप्ता अपने कारनामों एवं अभद्र भाषा शैली को लेकर आए दिन सुर्खियों में छाए रहते हैं। अपने मुख से बोल बचन बोलने वाले डॉ गुप्ता अपने पद के साथ अपनी भाषा शैली की मर्यादा इस कदर भूल जाते हैं कि उनके लिए क्या आम क्या खास, किसी की परवाह नहीं करते हैं।
ज्यादातर अपंजीकृत डॉक्टर जिसे चलन की भाषा में लोग झोलाछाप डॉक्टर बोलते हैं, प्रशासनिक तौर पर इन पर कई बार छापामार कार्रवाईयां होती रहती हैं लेकिन ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों का क्या जो शासन से वेतन लेने के बाद अपने घर बैठकर क्लीनिक चलाते हैं और मरीज दिनभर अस्पतालों में डॉक्टरों का इंतजार करते रहते हैं।
शासन द्वारा शासकीय अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार एवं ज्यादा से ज्यादा मरीजों के इलाज के लिए ओपीडी के समय सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक का किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इलाज का लाभ मिल सके।
ओपीडी में लग रही लंबी कतारें, आवास पर कर रहे उपचार
अमानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लगभग सैकड़ों गांव जुड़े हुए हैं जो अच्छे इलाज की चाह में अमानगंज अस्पताल आते हैं और ओपीडी में दिनभर लाइन में लगे रहते हैं लेकिन डॉक्टर अस्पताल पर कम और आवास पर मरीजों का ज्यादा उपचार करते हैं और शासन की वेतन के साथ घर पर मरीजों से मोटी रकम वसूलते हैं।
आयुष डॉक्टर के जिम्मे ओपीडी के मरीज
वर्तमान में अस्पताल में दो चिकित्सक हैं जिनमें डॉक्टर अमित मिश्रा को बीएमओ का प्रभार होने से फील्ड के काम एवं पीएम एमएलसी आदि अनेकों काम आ जाते हैं अब ऐसे में ओपीडी की जिम्मेदारी डॉ गुप्ता को संभालनी चाहिए लेकिन मरीजों को कुछ समय देने के बाद ज्यादातर ओपीडी की जिम्मेदारी आयुष डॉक्टर के भरोसे होती हैं।
जाति पूछ कर करते हैं इलाज
डॉ गुप्ता के पास जो मरीज उपचार कराने जाते हैं जिनसे वह परिचित नहीं होते हैं उनसे उनकी जाति पूछ कर इलाज करते हैं।
जांच फीस को लेकर मरीजों से करते हैं अभद्रता
कई बार देखा गया है कि जो गरीब मरीज इनके पास इलाज करने पहुंच जाते हैं, फीस के अभाव में कई बार इनके द्वारा मरीजों से अभद्रता भी की गई है। जिसपर कई बार मरीजों के परिजनों से लड़ाई झगड़े तक बात पहुंच जाती है।
लगातार शिकायतों के बाद पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा दूरभाष पर अमानगंज तहसीलदार को डॉ गुप्ता की जांच कर पंचनामा बनाने के लिए निर्देशित किया गया था। जिस पर तहसीलदार द्वारा दो बाबू मोहन एवं हुकुम चंद्र अग्रवाल एवं दो पटवारी नरेंद्र एवं बृजेश पटेल की टीम के साथ डॉ. गुप्ता के आवास पर जांच करने पहुंचे जहां डॉक्टर गुप्ता मरीजों को अपने आवास पर जमीन में लिटा कर वाटल इंजेक्शन लगा रहे थे। जिसकी तहसीलदार द्वारा जांच कर पंचनामा तैयार किया। जिस पर बौखलाहट में डॉक्टर गुप्ता तहसीलदार पर ही उल्टे भड़क उठे और उनको धमकी भरे लहजे में कहा कि जो करना हो कर लेना आदि विवादास्पद बातें करने लगे।
डॉ गुप्ता ने कहा तहसीलदार गुंडे लेकर आए थे
स्थानीय मीडिया द्वारा डॉक्टर से जब घटनाक्रम के बारे में जानकारी चाही गई तो डॉ गुप्ता का कहना था कि तहसीलदार गुंडों को लेकर आए थे। उन्हें जो करना है कर ले मेरे घर पर जो मरीज आएगा मैं उनका उपचार करूंगा।
तहसीलदार मेरे घर गुंडे लेकर आए थे। मैं उन्हें नहीं पहचानता हूं। आज मेरा ऑफ डे था। मैं ड्यूटी पर नहीं हूं।कलेक्टर ने उन्हें आदेश दिया है या नहीं मुझे नही पता।उनको मेरे घर पर जांच करनी है तो सर्च वारंट के साथ आना चाहिए था: डॉ. एम.के.गुप्ता, चिकित्सक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमानगंज।
कलेक्टर महोदय द्वारा दूरभाष पर मुझे निर्देशित किया गया था जिस पर मेरे द्वारा डॉ गुप्ता के शासकीय आवास पर जाकर देखा गया तो वहां वह मरीजों का उपचार करते पाए गए जिसका प्रतिवेदन बनाकर उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया गया: रामलाल विश्वकर्मा, तहसीलदार अमानगंज।
कलेक्टर महोदय के निर्देशन पर डॉ. गुप्ता की वेतन वृद्धि रोक दी गयी है एवं जांच जारी है: डॉ. एल.के. तिवारी, जिला मुख्यचिकित्सा अधिकारी पन्ना।
