भारत के आंतरिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था को बनाए रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें: मनोज परमार | New India Times

पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (मप्र), NIT:

भारत के आंतरिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था को बनाए रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें: मनोज परमार | New India Times

जिस तरह सरहद पर भारतीय सीमा की सुरक्षा हमारे जांबाज वीर जवान करते हैं, उसी तरीके से हम भी इस देश के नागरिक होने के नाते यह प्रण लें कि भारत के आंतरिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था को बनाए रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे। हमारे देश में कई प्रकार की समस्याएं व्याप्त हैं, जैसे महिला अपराध, राजनीति का अपराधीकरण, अस्पृश्यता छुआछूत, गरीबों और अमीरों के बीच की आर्थिक असमानता की खाई दिनोंदिन बढ़ते जाना, अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि दर, श्रमिकों के प्रति उदासीनता, देश के अन्नदाता का आत्महत्या पर मजबूर होना, छोटी छोटी बच्चियों के खिलाफ बलात्कार की घटनाओं का दिनों-दिन बढ़ते जाना, बेरोजगारी की दर दिन प्रतिदिन बढ़ते जाना, अस्पतालों और शिक्षा का व्यवसायीकरण तीव्र गति से होना, कन्या भ्रूण हत्या, दहेज हत्या आदि हजारों समस्याएं हमारे इस देश में हमारे समाज में व्याप्त हैं, जिन्हें दूर करने की जिम्मेदारी आप हम सबकी हैं। हम कब तक सरकार के भरोसे रहे और सरकार की ओर मुंह ताकते रहे। हम जानते हैं कि सरकारी स्तर पर कोई सा भी प्रयास बहुत ही असरकारक होता है,,,, पर हम सामाजिक स्तर पर मिलकर इस देश में तो समस्याओं के निराकरण के लिए मिलकर काम करें और इस देश में शोषण, अत्याचार, अन्याय, जुर्म, अपराध आदि के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करें।
आज वैश्विक स्तर पर भी पर्यावरण असंतुलन के कारण ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत में क्षति, जल और वायु प्रदूषण के कारण समुद्री जीव जंतु वनस्पति व अन्य जीव जंतु पर जीवन संकट लगातार बढ़ते जा रहा है। जिस के निदान हेतु सार्वभौमिक वैश्विक स्तर पर इमानदारी से सार्थक प्रयास की आवश्यकता है।
आज हमारे देश में माननीय प्रधानमंत्री के सार्थक पहल के कारण स्वच्छता के प्रति हमारी सोच में एक सार्थक बदलाव हुआ है तथा हम स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार नागरिक बने हैं। जिस प्रकार से हम स्वच्छता के प्रति जवाबदार नागरिक बने हैं उसी प्रकार से जल संरक्षण, वृक्षारोपण, वन्य जीव जंतुओं की रक्षा का दायित्व भी पूरी ईमानदारी से निभाएं।
हमारे समाज में आज हमारे सामाजिक व्यवस्था और सामाजिक ताना-बाना, जो पूर्व में व्याप्त था, आज इस आधुनिकता और विकास के दौर में चूर चूर हो चुका है। आज घर घर में लड़ाई झगड़ा मनमुटाव अनबन कई प्रकार की समस्याएं व्याप्त हैं। आज आधुनिक साधन संसाधनों के बावजूद पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे, परिवारजन, रिश्तेदार, दोस्त एक दूसरे के साथ होकर भी बहुत दूर हो चुके हैं।
क्या यह ऐसा ही चलता रहेगा या इन सब का अंत भी है और हम और हमारा पूरा परिवार, रिश्तेदार, समाज आदि हम सब एक होकर मिलकर एक छत के नीचे,,,, जिस प्रकार से हमारे दादा दादी के समय हम रहे हैं आज रह सके और जी भर कर जी सकें।
*दोस्तों आओ मिलकर हम यह प्रण ले कि आजादी के इस पर्व पर हम एकाग्र चित्त शांत मन से सोचें और मिलकर हमारे परिवार, हमारे समाज, हमारे देश के लिए एक नए भारत के निर्माण में हमारा महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करें और आने वाली पीढ़ी के खुशहाल,सुखमय और समृद्ध जीवन के लिए एक नए विकसित, सांस्कृतिक, सुशिक्षित, वैभवपूर्ण भारत, नए समाज की मजबूत बुनियाद और आधारशिला तैयार करें, यह विचार जय भीम के तहसील अध्यक्ष देपालपुर के मनोज परमार ने व्यक्त किए।

By nit

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